गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं देखना चाहिये चांद: गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया था श्राप? जानें पूरी पौराणिक कथा, गणेश चतुर्थी 2026 की तारीख और पूजा मुहूर्त
भगवान गणेश ने चंद्रमा को क्यों श्राप दिया था? जानें गणेश और चंद्रमा की पौराणिक कथा, गणेश चतुर्थी 2026 की तारीख, पूजा मुहूर्त और गणपति विसर्जन की जानकारी।

Lord Ganesha Moon Curse Story: गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और उनकी पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी को लेकर कई मान्यताएं हैं। धार्मिक मान्यताओं में गणेश चतुर्थी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी मिलती हैं। इन्हीं में से एक कथा भगवान गणेश और चंद्रमा से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान गणेश ने अपने रूप का मजाक उड़ाने पर चंद्रमा को श्राप दिया था। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।
भगवान गणेश और मूषक की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने प्रिय मोदक खाकर मूषक पर सवार होकर कैलाश की ओर जा रहे थे। रास्ते में अचानक एक बड़ा सांप सामने आ गया। सांप को देखकर मूषक घबरा गया और तेजी से भागने लगा।
मूषक के अचानक भागने से भगवान गणेश का संतुलन बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर पड़े। उनके गिरने से पेट पर बंधे मोदक बाहर निकल गए। भगवान गणेश ने तुरंत सभी मोदकों को उठाया और वापस अपने पेट में रख लिया। इसके बाद उन्होंने उसी सांप को अपने पेट पर बांध लिया।
चंद्रमा ने उड़ाया भगवान गणेश का मजाक
भगवान गणेश के साथ हुई यह पूरी घटना चंद्रमा देव देख रहे थे। धार्मिक कथा के अनुसार, चंद्रमा को अपनी सुंदरता पर बहुत अहंकार था। भगवान गणेश को जमीन पर गिरते और फिर सांप से पेट बांधते देखकर चंद्रमा हंसने लगे।
चंद्रमा ने भगवान गणेश के रूप का उपहास किया। चंद्रमा के इस व्यवहार से भगवान गणेश क्रोधित हो गए। उन्होंने चंद्रमा को उसकी सुंदरता और अहंकार के लिए श्राप दे दिया।मान्यता के अनुसार भगवान गणेश ने कहा कि चंद्रमा को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड है, इसलिए उसका तेज समाप्त हो जाएगा और जो व्यक्ति उसे देखेगा, उसे झूठे कलंक का सामना करना पड़ सकता है।
श्राप से चंद्रमा का तेज हुआ समाप्त
भगवान गणेश का श्राप मिलते ही चंद्रमा का तेज समाप्त होने लगा। चंद्रमा के प्रकाश के कम होने से संसार में भी परेशानियां बढ़ने लगीं। इसके बाद देवताओं और चंद्रमा ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी।
चंद्रमा के पश्चाताप और विनम्रता को देखकर भगवान गणेश का क्रोध शांत हुआ। उन्होंने अपना श्राप पूरी तरह वापस नहीं लिया, लेकिन उसके प्रभाव को सीमित कर दिया।धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रमा की कलाएं इसी घटना से जुड़ी मानी जाती हैं। कृष्ण पक्ष में चंद्रमा धीरे-धीरे घटता है और शुक्ल पक्ष में उसका आकार फिर बढ़ता है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा कलंक लग सकता है। इसे स्यमंतक मणि की कथा से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि यदि गणेश चतुर्थी के दिन भूलवश चंद्रमा दिखाई दे जाए, तो भगवान गणेश की पूजा करने और उनसे जुड़ी कथा का श्रवण करने से दोष का निवारण किया जा सकता है।यह मान्यता धार्मिक और पौराणिक परंपराओं पर आधारित है।
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे होगा और चतुर्थी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व और गणपति स्थापना 14 सितंबर को की जाएगी।
गणेश चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष शुभ माना जाता है।
गणेश पूजा मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
पूजा की अवधि: लगभग 2 घंटे 28 मिनट
भक्त इस अवधि में विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं।
गणपति विसर्जन 2026 कब होगा?
गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को होगी। इसी दिन देशभर में गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
हालांकि परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कई भक्त गणपति स्थापना के बाद डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन या 7 दिन के बाद भी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं कई जगहों पर अनंत चतुर्दशी के दिन सामूहिक रूप से गणपति विसर्जन किया जाता है।












