जिस बेटे की लंबी उम्र के लिए मां ने रखा निर्जला जिउतिया व्रत, पारण के बाद मिली मौत की खबर… डेड बॉडी देख चीत्कार से फट पड़ा कलेजा
जमशेदपुर में मां ने इकलौते बेटे की लंबी उम्र के लिए निर्जला जिउतिया व्रत रखा था। वियतनाम में सड़क हादसे में बेटे की मौत हो गई। पारण के बाद मां को मिली दर्दनाक खबर।

जमशेदपुर। मां ने बेटे की लंबी उम्र और सलामती के लिए निर्जला जिउतिया व्रत रखा था। घर में अखंड दीप जल रहा था। मां को भरोसा था कि जिस बेटे के लिए वह दिनभर बिना अन्न-जल के तप कर रही है, वह दूर वियतनाम से एक दिन फिर घर लौटेगा। लेकिन मां की मन्नतों से बेखबर नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।
जिस बेटे की सलामती के लिए मां ने जिउतिया का कठिन व्रत रखा, वह अब इस दुनिया में नहीं था। मां को इसकी भनक तक नहीं थी। घर के लोग उस कड़वे सच को अपने सीने में दबाए रहे, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि बेटे की मौत की खबर सुनकर मां का व्रत बीच में टूटे।
जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर ब्लॉक नंबर-4 निवासी रमेश राय के परिवार में रविवार को वही पल आया, जिसका सामना किसी माता-पिता को न करना पड़े। जिउतिया के पारण के बाद मां लगन देवी को बताया गया कि उनका इकलौता बेटा विनय कुमार राय अब कभी घर लौटकर नहीं आएगा।
बेटे की सलामती के लिए मां तपती रही, उधर बेटे का शव घर पहुंच गया
विनय कुमार राय करीब दो साल पहले योग प्रशिक्षक के रूप में काम करने वियतनाम गया था। माता-पिता ने बड़े अरमानों से उसे पढ़ाया-लिखाया और विदेश भेजा था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा अपने पैरों पर खड़ा होगा और आगे चलकर माता-पिता का सहारा बनेगा।लेकिन 25 सितंबर को वियतनाम में हुई सड़क दुर्घटना ने परिवार की सारी उम्मीदें छीन लीं। हादसे में विनय की मौत हो गई।
इधर जमशेदपुर में उसकी मां अपने बेटे की जिंदगी के लिए जिउतिया का निर्जला व्रत कर रही थीं। घर में अखंड दीप जल रहा था और किसी को यह हिम्मत नहीं हो रही थी कि उस मां को बता सके कि जिसके लिए वह उपवास कर रही है, वही बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
पारण तक छिपाकर रखा गया मां से सबसे बड़ा सच
परिवार के लिए यह सिर्फ बेटे की मौत का दुख नहीं था, बल्कि उस मां के सामने खड़े होने की भीषण घड़ी थी, जो अपने बेटे की सलामती की कामना कर रही थी।
परिजनों ने तय किया कि जिउतिया का व्रत पूरा होने और पारण के बाद ही लगन देवी को बेटे की मौत की जानकारी दी जाएगी।रविवार को जब व्रत का पारण हुआ, तब वह सच मां के सामने रखा गया, जिसे परिवार कई दिनों से अपने भीतर दबाए बैठा था।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार में मातम पसर गया। जिस घर में मां बेटे की लंबी उम्र की प्रार्थना कर रही थी, उसी घर में उसके जाने का दुख आंसुओं और चीत्कार में बदल गया।
पिता ने बेटे को विदेश भेजा था भविष्य बनाने, शव लेकर लौटना पड़ा
विनय के पिता रमेश राय ने बेटे को बड़े सपनों के साथ वियतनाम भेजा था। उन्हें उम्मीद थी कि इकलौता बेटा आगे चलकर परिवार का सहारा बनेगा।विनय योग शिक्षक के रूप में वियतनाम में काम कर रहा था। पिता के लिए बेटे को विदेश भेजना केवल रोजगार का फैसला नहीं था, बल्कि उसके बेहतर भविष्य का सपना था।
लेकिन जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, उसका पार्थिव शरीर शनिवार को जमशेदपुर पहुंचा।फिलहाल विनय का शव टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) के शीतगृह में रखा गया है। रविवार सुबह करीब 10 बजे शव को शास्त्रीनगर स्थित घर ले जाया जाएगा। इसके बाद बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कुंभ में पूरे परिवार को कराया था स्नान, फिर शादी की तैयारी थी
विनय के पिता की आंखों में बेटे से जुड़ी कई यादें हैं। दो साल पहले वियतनाम जाने के बाद जब वह भारत लौटा था, तब प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में पूरे परिवार को अपने खर्च पर स्नान कराया था।
परिवार के लिए वह समय खुशी और साथ बिताए पलों से भरा था। इस बार जब विनय भारत लौटता तो परिवार उसकी शादी की बात आगे बढ़ाने की तैयारी में था।
किसी को क्या पता था कि जिस बेटे के घर लौटने पर शादी की चर्चा होनी थी, उसके घर आने की खबर इस बार हमेशा के लिए उसकी विदाई की होगी।
विदेश की धरती पर छूटा बेटा, मदद से घर पहुंचा पार्थिव शरीर
25 सितंबर को वियतनाम में हुए सड़क हादसे में विनय राय के साथ रांची निवासी राजा कुमार की भी मौत हुई थी। विनय के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शव को भारत लाने की प्रक्रिया उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
परिजनों ने भाजपा नेताओं से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ की पहल पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रयासों से विनय का पार्थिव शरीर शनिवार दोपहर कोलकाता हवाई अड्डे पहुंचा। वहां से एंबुलेंस के जरिए शव को जमशेदपुर के टीएमएच लाया गया।
बेटे का सामान भी अपने पास नहीं रखना चाहता परिवार
बेटे को खोने का दर्द इतना गहरा है कि परिवार अब उसकी यादों से जुड़ी चीजों को लेकर भी भावुक है। रमेश राय ने बताया कि वियतनाम में कंपनी के पास विनय का कुछ सामान है।
परिवार की इच्छा है कि बेटे का जो सामान वहां रह गया है, उसे किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को दे दिया जाए।
एक पिता के लिए इससे बड़ा दर्द शायद क्या होगा कि जिस बेटे के भविष्य के लिए उसने उसे हजारों किलोमीटर दूर भेजा था, उसी बेटे की अंतिम यात्रा के लिए अब उसका पार्थिव शरीर घर लाना पड़ा।
मां ने जिउतिया में बेटे की लंबी उम्र मांगी थी… लेकिन पारण के बाद उसके सामने बेटे की मौत का सच था। एक मां का व्रत पूरा हुआ, मगर उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी।












