JPSC-JSSC भर्ती रद्दीकरण पर हाई कोर्ट की रोक, सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत; सरकार से मांगा जवाब, डिप्टी कलेक्टर ने दायर की थी याचिका.. जानिये किन किन परीक्षा पर लगी रोक
High Court stays cancellation of JPSC-JSSC recruitments, bringing major relief to successful candidates; response sought from the government following a petition filed by a Deputy Collector. Find out which exams are affected by the stay.

रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार की ओर से 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया था। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
JPSC 11वीं-13वीं परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक
जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने सौरभ सिंह और सोनम कुमारी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित अन्य परीक्षाओं को रद्द किया गया था।सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए जवाब दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने इस मामले में फास्ट-ट्रैक सुनवाई के लिए व्यवस्था बनाने का भी निर्देश दिया है।
अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, यदि परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या में लोग गलत तरीके से चयनित हुए हों, तब भी सरकार सभी सफल अभ्यर्थियों को सीधे सेवा से नहीं हटा सकती। मामले में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना जरूरी है।
डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी ने दी थी चुनौती
JPSC की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में चयनित होकर डिप्टी कलेक्टर बनीं सोनम कुमारी ने भी सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। वह हजारीबाग जिले में पदस्थापित थीं।
याचिका के मुताबिक, उन्होंने चयन के बाद बिहार के गया जिले में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखंड में डिप्टी कलेक्टर के पद पर योगदान दिया था। राज्य सरकार की ओर से उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था। इसके बाद वह अपने पद पर कार्यरत थीं।
सरकार की ओर से विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत हुई JPSC परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद उनकी नियुक्ति भी प्रभावित हुई। सोनम कुमारी ने हाई कोर्ट से सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की थी।
करीब 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग पर भी असर
JPSC की 11वीं, 12वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से नियुक्त करीब 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग भी सरकार के फैसले के बाद प्रभावित हुई है। नवनियुक्त अधिकारियों ने श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लिया था और इसके बाद उन्हें जिलों में प्रोबेशन के दौरान प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। कई अधिकारी रांची पहुंचने लगे थे।देवघर के बाबा धाम में विधि व्यवस्था के लिए तैनात किए गए करीब 40 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को भी ड्यूटी से हटाया गया था। वहीं दुमका के बासुकीनाथ में करीब 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को दंडाधिकारी के रूप में तैनात किया गया था।
22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का क्या था मामला?
झारखंड सरकार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच के बाद 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार की कार्रवाई के दायरे में JPSC और JSSC से जुड़ी कई महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाएं आई थीं।इनमें JPSC 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सिविल जज, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर, असिस्टेंट इंजीनियर, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट समेत विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रियाएं शामिल बताई गई थीं।सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच के लिए CID और SIT की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की थी। फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों के बीच भारी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
चार याचिकाओं के जरिए हाई कोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें JPSC 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं में अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी और सौरभ सिंह समेत अन्य सफल अभ्यर्थी शामिल हैं। उनका तर्क था कि चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी परीक्षा को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है, जिनका चयन किसी गलती या अनियमितता में शामिल हुए बिना हुआ है।
अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल सफल अभ्यर्थियों और नियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है। अब राज्य सरकार को अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। JPSC-JSSC भर्ती विवाद में हाई कोर्ट के इस आदेश से उन हजारों अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी है, जिनका भविष्य सरकार के 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से प्रभावित हुआ था।












