झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षा रद्द होगी या फैसला बदलेगा? हाईकोर्ट में 14 याचिकाओं पर सुनवाई, अब 7 अक्टूबर को क्या होगा?
Jharkhand: Will the JPSC-JSSC exams be cancelled or the decision reversed? High Court hears 14 petitions—what will happen on October 7?

रांची। परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत के बाद झारखंड में JPSC और JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। परीक्षा रद्द करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है। परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट में इस मामले से जुड़ी सभी 14 याचिकाओं पर सुनवाई की गई।
इन याचिकाओं में JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सर्विस परीक्षा, JSSC CGL, CDPO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार के निर्णय के खिलाफ अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखी गईं।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रार्थियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है।
परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हाईकोर्ट में दायर इन याचिकाओं पर होने वाली आगे की सुनवाई से परीक्षा प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।फिलहाल शुक्रवार की सुनवाई के बाद परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर कोई अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। अब सभी की नजरें 7 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं।
43 सीट को हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखवाया
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा 2023 से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने आदित्य कुमार एवं अन्य अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के हित में 43 सीटें सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी और कोर्ट ने इसे अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।यह मामला विज्ञापन संख्या 13/2023 के तहत सहायक आचार्य के पद पर नियुक्ति से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने अपनी-अपनी श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों से अधिक अंक हासिल किए हैं, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में उन्हें उचित अवसर नहीं मिला।
पारा और नन-पारा दोनों श्रेणियों का मामला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत के समक्ष कहा कि संबंधित श्रेणियों में अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में याचिकाकर्ताओं के अंक अधिक हैं।उन्होंने यह भी दलील दी कि पारा और नन-पारा, दोनों श्रेणियों में सीटें रिक्त होने के बावजूद अधिक अंक प्राप्त करने वाले याचिकाकर्ताओं के मामलों पर समुचित विचार नहीं किया गया।याचिकाकर्ताओं की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया में उनके दावे पर विचार करने की मांग अदालत के सामने रखी गई।
तय समय में जवाब दाखिल नहीं कर सका JSSC
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने JSSC को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद आयोग की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया जा सका।अब मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। इस तारीख को अदालत मामले की अंतिम सुनवाई करेगी और दोनों पक्षों की दलीलों तथा रिकॉर्ड के आधार पर आगे का आदेश पारित कर सकती है।












