IIT में 5 साल में 53 छात्रों की मौत, 45 ने तो आत्महत्या कर ली; SC-ST-OBC के 29 छात्र भी शामिल, 20 साल में 173 IIT स्टूडेंट की मौत
IIT में 2020-21 से 2024-25 के बीच 53 छात्रों की मौत हुई। इनमें 45 आत्महत्या के मामले थे और SC, ST व OBC वर्ग के 29 छात्र शामिल थे।

नई दिल्ली। ..अब ये बढ़ता हुआ दवाब है या फिर हालात से हारने की मजबूरी…लेकिन देश में होनहारों की लगातार हो रही मौत, वाकई में चौकाने वाली है। IIT में पढने की तमन्ना आज हर युवाओं की होती है, लेकिन देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शामिल IIT में दाखिले के बाद बच्चे क्यों अपनी जान दे रहे हैं? शिक्षा मंत्रालय को IIT की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच पांच वर्षों में 53 छात्रों की मौत हुई। इनमें 45 मौतें आत्महत्या के रूप में दर्ज हैं, जबकि 8 मामले अन्य अप्राकृतिक मौतों से जुड़े हैं।
आंकड़ों की सबसे अहम बात यह है कि इन 53 मामलों में 29 छात्र SC, ST और OBC वर्ग से थे। यानी कुल मौतों में इन तीन सामाजिक वर्गों की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही। हालांकि, आंकड़े यह साबित नहीं करते कि इन छात्रों की मौत का कारण जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न था।
IIT कानपुर के पूर्व छात्र और ‘ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप’ के संस्थापक धीरज सिंह द्वारा दायर आरटीआई (RTI) से मिले आंकड़े डराने वाले हैं-वर्ष 2005 से 2024 के बीच देश भर के IIT संस्थानों में कुल 115 छात्रों ने आत्महत्या की. इनमें से 98 मामले कैंपस के अंदर और 17 मामले कैंपस के बाहर के थे. आत्महत्या के सबसे ज्यादा 26 मामले IIT मद्रास में दर्ज किए गए. इसके बाद IIT कानपुर में 18, IIT खड़गपुर में 13 और IIT बॉम्बे में 10 छात्रों की मौत के मामले सामने आए।
अचानक बढ़ी IIT छात्रों की मौत की संख्या
अगर हम पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो 2023-24 और 2024-25 में मौतों की संख्या पहले के वर्षों के मुकाबले काफी ज्यादा रही।2020-21 में 5, 2021-22 में 6 और 2022-23 में 6 छात्रों की मौत हुई थी। इसके बाद 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 17 हो गई और 2024-25 में 19 छात्रों की मौत दर्ज की गई।यानी सिर्फ 2023-24 और 2024-25 को मिलाकर 36 छात्रों की मौत हुई, जो पांच वर्षों में दर्ज कुल 53 मौतों का बड़ा हिस्सा है।
53 मौतों में किस वर्ग के कितने छात्र?
शिक्षा मंत्रालय को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार मृत छात्रों की सामाजिक श्रेणी इस प्रकार रही:
वर्ग छात्रों की मौत कुल में हिस्सेदारी
जनरल 23 43.4%
OBC 12 22.6%
SC 10 18.9%
ST 7 13.2%
EWS 1 1.9%
कुल 53 100%
इस हिसाब से OBC, SC और ST के 29 छात्रों की मौत हुई। यह कुल मामलों का करीब 54.7 प्रतिशत है।लेकिन इन आंकड़ों को छात्रों की कुल आबादी के अनुपात से अलग करके देखने पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मौत के प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
आत्महत्या के 45 मामले, बाकी 8 मौतें अप्राकृतिक
53 मौतों में 45 मामले आत्महत्या से जुड़े थे, जबकि 8 मौतों को अप्राकृतिक मौत की श्रेणी में रखा गया।इसका मतलब यह है कि पांच साल में दर्ज IIT छात्रों की मौतों में करीब 85 प्रतिशत मामले आत्महत्या के थे। यही वजह है कि IIT में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, अकादमिक दबाव, सामाजिक परिस्थितियों और संस्थागत सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
संसद में भी पहुंचा IIT छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा
IIT छात्रों की आत्महत्या को लेकर संसद में भी सवाल उठ चुके हैं। 25 नवंबर 2024 को लोकसभा में सांसद एंटो एंटनी ने शिक्षा मंत्रालय से IIT में छात्रों की आत्महत्या से संबंधित आंकड़े मांगे थे।उन्होंने पूछा था कि पिछले पांच वर्षों में अलग-अलग IIT में कितने छात्रों ने आत्महत्या की और इनमें SC, ST तथा OBC वर्ग के कितने छात्र थे।
इसके साथ ही उन्होंने आत्महत्या रोकने के लिए उठाए गए कदमों और IIT में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संख्या की जानकारी भी मांगी थी।सरकार की ओर से जवाब में बताया गया था कि आत्महत्या से संबंधित आधिकारिक आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB द्वारा पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर संकलित किए जाते हैं।
2025 में IIT से दोबारा मांगी गई जानकारी
छात्रों की मौत से जुड़े आंकड़ों को लेकर 2025 में भी जानकारी जुटाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी नीलेश चंद्र श्रीवास्तव ने 1 दिसंबर 2025 को सभी IIT को पत्र भेजकर छात्रों की आत्महत्या से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
यह जानकारी लोकसभा में पूछे जाने वाले एक सवाल के जवाब के लिए मांगी गई थी। मंत्रालय को IIT से आंकड़े प्राप्त भी हुए, लेकिन यह जानकारी संसद में पेश नहीं की गई।इसके बाद 8 दिसंबर 2025 को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने IIT समेत केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े सवाल उठाए थे।
अब साहिल वाकोडे की मौत से फिर उठा सवाल
IIT में छात्रों की मौत का यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए।
साहिल की मौत के बाद IIT परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। परिवार ने उनकी मौत के पीछे कथित जातिगत उत्पीड़न को वजह बताया है। मुंबई पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।अब जांच का विषय यह है कि साहिल की मौत किन परिस्थितियों में हुई और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।











