Jharkhand High Court: बरी होने के बाद भी महिला को क्यों नहीं किया रिहा? हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, गृह सचिव को किया तलब, 5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई, जानिये क्या है पूरा मामला
Jharkhand High Court ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बरी होने के बाद भी हिरासत में रखी गई पीड़िता के मामले में रिपोर्ट मांगी है। जानें कोर्ट ने क्या निर्देश दिए।

Jharkhand High Court: बरी किये जाने के बाद भी महिला को रिहा नहीं किये जाने को लेकर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि आखिरकार किस अधिकार के तहत महिला को रिहा नहीं किया गया। दरअसल ये पूरा मामला हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर से जुड़ा है, जहां एक महिला के साथ कस्टोडियल रेप के गंभीर आरोपों और आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी उसे लगातार हिरासत में रखे जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पूछा कि आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी पीड़िता को किस कानूनी आधार पर हिरासत में रखा गया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने हजारीबाग DLSA से जांच रिपोर्ट मांगी है। साथ ही हजारीबाग के एसपी को भी पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को भी उस दिन व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका
दरअसल ये पूरा मामला W.P. (Cr.) (D.B.) (HB) No.582 of 2026 से जुड़ा है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता जेल में बंद लोगों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं।याचिका में पीड़िता को अदालत के सामने पेश करने, उन्हें तत्काल रिहा करने और उनकी हिरासत कानूनी है या नहीं, इसकी न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है।
बरी होने के बाद भी हिरासत में रखने पर कोर्ट का सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष पक्ष रखा। कोर्ट को बताया गया कि जी.आर. केस नंबर 1647/2025, जो लोहसिंगना थाना कांड संख्या 88/2025 से संबंधित है, में पीड़िता को बरी किया जा चुका है।इसके बावजूद पीड़िता के हिरासत में रहने की जानकारी सामने आने पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि आपराधिक मामले में बरी होने के बाद उन्हें जेल या डिटेंशन सेंटर में रखने का आखिर कानूनी आधार क्या है।
पुलिस कांस्टेबल पर लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में एक पुलिस कांस्टेबल रंजीत महतो के खिलाफ पीड़िता की ओर से लगाए गए यौन शोषण के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन आरोपों को लेकर शिकायत भी की गई है।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपों की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई और रिपोर्ट मांगी है।
DLSA की टीम करेगी डिटेंशन सेंटर में जांच
हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (JHALSA) के सदस्य सचिव को हजारीबाग DLSA के सचिव और उनकी टीम के जरिए मामले की जांच कराने का निर्देश दिया।सदस्य सचिव ने वर्चुअल माध्यम से अदालत को बताया कि DLSA सचिव अपनी टीम के साथ डिटेंशन सेंटर पहुंचकर पीड़िता का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।
हजारीबाग एसपी ने जांच का दिया भरोसा
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हजारीबाग के एसपी को भी वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।एसपी ने कोर्ट को बताया कि रंजीत महतो के खिलाफ लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच तत्काल शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि डिटेंशन सेंटर में रह रही पीड़िता की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे।
गृह सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से होना होगा पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि आरोप पुलिस अधिकारी से संबंधित हैं, इसलिए गृह सचिव की मौजूदगी जरूरी है। उन्हें 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है।अब अगली सुनवाई में DLSA की जांच रिपोर्ट, पुलिस की कार्रवाई और पीड़िता की हिरासत के कानूनी आधार से जुड़े सवालों पर अदालत के सामने स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।












