सड़क नहीं तो सहारा ही सही! रात के अंधेरे में गर्भवती को दउरी में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाए ग्रामीण, गुमला में बदहाल सड़क ने खोली व्यवस्था की पोल

गुमला।झारखंड के आजादी के 26 साल बाद भी बदहाल सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था देख आपको शर्मिंदा होने को मजबूर कर देगी।सरकार लाख “अपनी डफली अपना राग” अलापते रहे परंतु खबर मे दिखने वाली वीडियो और तस्वीर देखकर आप महसूस करेंगे कि झारखंड मे रहना भी कोई काल कोठरी से कम नहीं है,जहां मूलभूत सुविधा से आम जनता आज भी कोसों दूर हैं। वीडियो में लाख दावे करने वाली सरकार की पोल खुद ब खुद बयां कर रही है।जहां इतने सालों बाद भी गर्भवती माता को अस्पताल जाने तक वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता!
मामला गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के कुहीपाठ पंचायत अंतर्गत गुनिया गांव का है, जहां सड़क की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत ऐसी है कि एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए वाहन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को दउरी/बहंगी के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ा। इसके बाद महिला को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद गांव की सड़क व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सड़क नहीं तो सहारा ही सही! गर्भवती को दउरी में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाए ग्रामीण।।
गुमला। घाघरा प्रखंड की कुहीपाट पंचायत के गुनिया गांव में सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि एक गर्भवती महिला को अस्पताल या वाहन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को दउरी में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा।
#Jharkhand #Gumla— Sohan singh (@sohansingh05) October 4, 2026
कीचड़ और गड्ढों से रास्ता हुआ बदहाल
ग्रामीणों के अनुसार गुनिया गांव की सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश के बाद सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है। स्थिति यह है कि गांव के अंदर वाहन पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खुद सहारा बनना पड़ रहा है।
क्या है मामला
ऐसी सड़क जिसपर न तो वाहन चल सकते हैं न ही आम ग्रामीण.. उस कठिन रस्ते पर गर्भवती माता को प्रसव पीड़ा में दउरी में ले जाना कितना कठिन काम हो सकता है।video में साफ दिख रहा कि अंधेरे और कीचड़ से सने मार्ग पर हाथ में बत्ती लिए गर्भवती की ले जाया जा रहा है। साथ में रोशनी हाथ में लिए साहिया दिखाई दे रही है जो कदम कदम पर बत्ती दिखाते स्वास्थ्य की जानकारी लेते साथ साथ चल रही है।
बताया गया कि गर्भवती महिला को दो लोगों ने दउरी/बहंगी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इस दौरान स्वास्थ्य सहिया भी साथ मौजूद थीं। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद महिला को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया।
दो महीने पहले बनी सड़क, फिर भी हाल बेहाल
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो महीने पहले पंचायत की 15वें वित्त आयोग की राशि से मिट्टी-मोरम सड़क का निर्माण कराया गया था। लेकिन बारिश के बाद सड़क की हालत और खराब हो गई। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति ऐसी ही रही तो किसी मरीज या गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी रहेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने और गांव तक सुगम आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है।
सरकारी रिकॉर्ड में भी गुनिया गांव दर्ज
गुमला जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार गुनिया गांव घाघरा प्रखंड के कुहीपाठ पंचायत क्षेत्र में शामिल है।
अब बड़ा सवाल यही है कि जिस सड़क पर ग्रामीणों के लिए वाहन तक पहुंचना मुश्किल है, उसकी स्थिति सुधारने के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाता है।












