रांची: सिपाही तो निकला बड़ा घोटालेबाज, 28 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा, कंप्यूटर डेटा में छेड़छाड़ कर फंड ट्रांसफर करने का आरोप
हजारीबाग एसपी कार्यालय से जुड़े 28 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी मामले में सीआईडी ने कोर्ट में साक्ष्य पेश किए। जांच में 21 बैंक खातों के इस्तेमाल का दावा।

रांची। हजारीबाग एसपी कार्यालय से जुड़े करीब 28 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी के मामले में सीआईडी की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रांची की सीआईडी विशेष अदालत में सिपाही शंभू कुमार सिंह के खिलाफ जालसाजी और सरकारी राशि की अवैध निकासी से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, शंभू कुमार सिंह हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में मुख्य लेखापाल के तौर पर काम करता था। आरोप है कि इसी दौरान उसने कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज वित्तीय डेटा में हेरफेर कर सरकारी फंड को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया।
करीब 10 साल तक चलता रहा कथित खेल
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि हजारीबाग एसपी कार्यालय के डीडीओ कोड HZBPOL007 का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय तक वित्तीय लेन-देन किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह गतिविधि करीब 10 वर्षों तक चलती रही और इस दौरान सरकारी राशि की निकासी की गई।
मामले में कागजी बिल और कंप्यूटर में दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड के बीच अंतर भी जांच का अहम हिस्सा बना है। सीआईडी के मुताबिक, बिल की हार्ड कॉपी में दर्ज राशि और उसकी सॉफ्ट कॉपी में दर्ज विवरण कई मामलों में एक जैसे नहीं थे।
दो अन्य सिपाहियों के साथ मिलकर डेटा बदलने का आरोप
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि शंभू कुमार सिंह पर सिपाही रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह और धीरेंद्र सिंह के साथ मिलकर कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज डेटा से छेड़छाड़ करने का आरोप है।
सीआईडी के मुताबिक, सिस्टम में बदलाव के जरिए राशि को एक बैंक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित किया गया। जांच आगे बढ़ने पर ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी सामने आई, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध लेन-देन के लिए किया गया।
गया के दो बैंक खातों तक पहुंची जांच
जांच के शुरुआती चरण में सरकारी राशि के ट्रांसफर का कनेक्शन बिहार के गया स्थित भारतीय स्टेट बैंक की अनुग्रह कॉलोनी शाखा के दो खातों से सामने आया।
इनमें एक खाता शंभू कुमार सिंह के नाम पर बताया गया है, जबकि दूसरा खाता संगीता चौधरी के नाम पर था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों खातों के माध्यम से सरकारी राशि के लेन-देन की जानकारी मिली।
वित्त विभाग की जांच में भी सामने आया था बड़ा गबन
मामले की वित्त विभाग से हुई जांच में भी इन दो खातों के माध्यम से कुल 15 करोड़ 41 लाख 41 हजार 485 रुपये के गबन का मामला सामने आने की बात कही गई है।
हालांकि, सीआईडी की विस्तृत जांच में कथित अवैध निकासी का दायरा इससे कहीं अधिक पाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब एक दशक के दौरान आरोपितों ने भारतीय स्टेट बैंक के कुल 21 खातों का इस्तेमाल किया और इन खातों के जरिए करीब 28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई।
कोर्ट में पेश किए गए जांच के साक्ष्य
सीआईडी की एसआईटी ने विशेष अदालत के समक्ष शंभू कुमार सिंह की कथित भूमिका से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। अब मामले में अदालत के समक्ष जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज और तथ्यों की भी समीक्षा की जा रही है।
यह पूरा मामला सरकारी राशि के लेखा-जोखा, कंप्यूटर रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और अलग-अलग बैंक खातों में धन हस्तांतरण से जुड़ा है। आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।












