नर्स बनने गई थी बेटी, दुबई में बना दिया नौकरानी: रांची की मोनिका का दर्द, पासपोर्ट छीनकर घर लौटने के नाम पर मांग रहे पैसे, पिता ने दर्ज करायी शिकायत
रांची की मोनिका कच्छप नर्स की नौकरी के लिए दुबई गई थीं। परिवार का आरोप है कि वहां पासपोर्ट रखकर उनसे घरों में काम कराया गया। परिजनों ने सुरक्षित वापसी के लिए सरकार से मदद मांगी है।

रांची: परिवार का सहारा बनने और नर्स की नौकरी कर अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर रांची की मोनिका कच्छप दुबई गई थीं। लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद उनके साथ जो हुआ, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। जिस बेटी को नर्सिंग के पेशे में आगे बढ़ने के लिए विदेश भेजा गया था, उसे एजेंटों ने धोखे में रखकर वहाँ नौकरानी बना दिया। अब मोनिका का परिवार अपनी बेटी की सुरक्षित व सकुशल वतन वापसी के लिए सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहा है।
साढ़े तीन साल की नर्सिंग पढ़ाई, फिर शुरू हुआ छलावा
मोनिका कच्छप ने करीब साढ़े तीन साल का नर्सिंग कोर्स पूरा किया है। परिवार के पास खेती-बारी के अलावा आय का कोई बड़ा साधन नहीं है, इसलिए वे चाहते थे कि बेटी अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार की मदद कर सके। इसी तलाश के दौरान मोनिका की ऑनलाइन बातचीत दुबई की ‘एएमडी ट्रेंड सॉल्यूशन एलएलसी’ और एक एजेंट प्रियंका से हुई।
एजेंटों ने मोनिका को नर्स की नौकरी दिलाने, साथ ही रहने और खाने की मुफ्त सुविधा देने का बड़ा झांसा दिया था। इस प्रक्रिया के नाम पर मोनिका ने गत 22 अप्रैल को 15 हजार रुपये फोनपे के जरिए ट्रांसफर किए थे। इसके बाद, तय वादों के तहत वह 5 मई को दिल्ली से शारजाह के लिए रवाना हुई, जहाँ से उसे दुबई पहुँचना था। लेकिन परिवार को क्या पता था कि यह सफर उनकी बेटी के लिए प्रताड़ना का नर्क बन जाएगा।
दुबई पहुँचते ही छीना पासपोर्ट, अरबी कागजों पर लिए अंगूठे के निशान
परिवार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक, दुबई पहुँचने के अगले ही दिन यानी 6 मई को ही मोनिका का पासपोर्ट उससे छीन लिया गया। इसके बाद 7 मई को उसे अजमान स्थित एक कार्यालय ले जाया गया।वहाँ उससे अरबी भाषा में लिखे कुछ कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए और अंगूठे के निशान लिए गए।
इसके कुछ समय बाद उसे बताया गया कि उसके ऊपर 12,600 दिरहम का कर्ज है। आरोपियों ने इस रकम की आड़ में उसे भारत लौटने से रोक दिया और धमकी दी कि अगर उसने पुलिस या किसी से शिकायत की, तो उसे जेल भिजवा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया और उसके व्हाट्सऐप की पुरानी चैट भी डिलीट कर दी गईं।
नर्स के बजाय घरों में बुजुर्गों की देखभाल का काम
आरोप है कि शुरुआत में मोनिका को एक घर में घरेलू काम के लिए रखा गया। इसके बाद, करीब एक महीने बीतने पर उसे अलग-अलग घरों में बुजुर्गों की देखभाल करने के बहाने भेजा जाने लगा। भाषा की गंभीर समस्या और लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न के बीच मोनिका लगातार अपने घर लौटने की जिद करती रही, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।
इस बीच, जब रांची में मोनिका की माँ की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई, तो परिवार की चिंता और बढ़ गई। माँ की बीमारी की खबर पाकर मोनिका का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और उसने हर हाल में भारत लौटने की इच्छा जताई। लेकिन इसके बावजूद एजेंटों ने उसका पासपोर्ट वापस करने से साफ इनकार कर दिया और भारत लौटने के एवज में भारी-भरकम रकम की मांग की।
पिता ने एयरपोर्ट थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी
बेटी की इस हालत से सहमे और मजबूर पिता रत्ना कच्छप ने अंततः हिम्मत जुटाकर 29 सितंबर को रांची के एयरपोर्ट थाने में इस धोखाधड़ी और प्रताड़ना की औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। इस शिकायत में प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी सहित अन्य लोगों को नामजद किया गया है।परिवार ने साफ आरोप लगाया है कि आरोपियों ने नौकरी के नाम पर विदेश भेजकर उनकी बेटी का पासपोर्ट बंधक बनाया, उससे जबरन काम कराया और अब भारत वापसी के लिए पैसों की मांग कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन से सुरक्षित वापसी की आस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अपनी तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मोनिका की सुरक्षित वतन वापसी के लिए भारतीय दूतावास (Indian Embassy) से भी संपर्क साधा जा रहा है।
दूसरी ओर, रांची में खेतों में मजदूरी और खेती कर जीवन बसर करने वाला यह गरीब परिवार अब झारखंड सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) से हाथ जोड़कर यह अपील कर रहा है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द सुरक्षित उनके घर वापस लाया जाए, ताकि एक बेटी का यह टूटता हुआ सपना और परिवार की उम्मीदें पूरी हो सकें।












