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Jharkhand Assistant Teacher Result: B.Ed ODL वालों का रिजल्ट क्यों रोका? JSSC पर उठे सवाल, पारा शिक्षकों के भविष्य पर भी संकट

Jharkhand Assistant Teacher भर्ती में B.Ed ODL अभ्यर्थियों का रिजल्ट लंबित होने का आरोप। जानें विवाद की वजह, पारा शिक्षकों के 50% आरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा मामला।

रांची: झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। विज्ञापन संख्या 13/2023 के तहत हुई भर्ती प्रक्रिया में B.Ed ODL यानी दूरस्थ शिक्षा से B.Ed करने वाले अभ्यर्थियों का परिणाम रोके जाने का आरोप लगाया गया है।

 

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अभ्यर्थियों का कहना है कि जब भर्ती नियमावली में निर्धारित योग्यता के तहत दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त B.Ed डिग्री को मान्यता दी गई है, तो फिर उनका परिणाम लंबित रखने की वजह क्या है? इसको लेकर B.Ed ODL धारक अभ्यर्थियों के साथ-साथ पारा शिक्षकों में भी नाराजगी है।

 

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आखिर B.Ed ODL अभ्यर्थियों का रिजल्ट क्यों अटका?

अभ्यर्थियों के मुताबिक सहायक आचार्य नियुक्ति की नियमावली में दूरस्थ शिक्षा से हासिल डिग्री को मान्य किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद उनका परिणाम आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।यही अब विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

 

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अभ्यर्थियों का दावा है कि एक वर्षीय रेगुलर B.Ed और दो वर्षीय B.Ed ODL को लेकर पैदा हुए अंतर के आधार पर उनके परिणाम को रोकना उचित नहीं है। उनका कहना है कि NCTE के 2009 के प्रावधानों में दोनों तरह के कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग व्यवस्था थी।

 

अभ्यर्थियों का दावा—हमारी डिग्री मान्य है

B.Ed ODL अभ्यर्थियों का कहना है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों से हासिल उनकी डिग्री UGC, NCTE और DEB के निर्धारित प्रावधानों के तहत मान्य है।कुछ अभ्यर्थियों का यह भी दावा है कि संबंधित विश्वविद्यालयों ने B.Ed ODL डिग्री को एक वर्षीय नियमित B.Ed के समकक्ष बताते हुए पत्र जारी किए हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर डिग्री मान्य है तो नियुक्ति प्रक्रिया में उनके परिणाम को अलग क्यों रखा जा रहा है?

 

मामला सिर्फ B.Ed का नहीं, पारा शिक्षकों के भविष्य का भी

इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू पारा शिक्षकों से जुड़ा है।अभ्यर्थियों के अनुसार सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली में पारा शिक्षकों यानी सहायक अध्यापकों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। B.Ed ODL धारक अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे पारा शिक्षकों की बताई जा रही है, जो लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं।

 

इन अभ्यर्थियों का दावा है कि वे JTET उत्तीर्ण हैं और भर्ती नियमावली में निर्धारित दूसरी योग्यताएं भी पूरी करते हैं।ऐसे में रिजल्ट लंबित रहने का असर सिर्फ एक परीक्षा के परिणाम पर नहीं, बल्कि वर्षों से स्कूलों में काम कर रहे पारा शिक्षकों के स्थायी भविष्य पर भी पड़ सकता है।

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला

B.Ed ODL अभ्यर्थियों ने अपने पक्ष में Parimal Kumar & Others vs. State of Jharkhand & Others, Civil Appeal No. 1297/2025 मामले का हवाला दिया है।अभ्यर्थियों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 2022 भर्ती नियमावली के तहत आवश्यक योग्यता रखने वाले JTET धारक अभ्यर्थियों की पात्रता और परिणाम घोषित करने को लेकर निर्देश दिए गए थे। अब अभ्यर्थियों का आरोप है कि इसके बावजूद B.Ed ODL धारकों का परिणाम लंबित रखा जा रहा है।

उनका कहना है कि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। हालांकि इस मामले में अदालत के आदेश की वास्तविक लागू सीमा और B.Ed ODL अभ्यर्थियों पर उसकी प्रत्यक्ष स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेश एवं भर्ती नियमों के आधार पर ही तय होगी।

 

JSSC और शिक्षा विभाग से मांगा स्पष्ट जवाब

अभ्यर्थियों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।उनका कहना है कि अगर B.Ed ODL डिग्री मान्य नहीं है तो इसकी स्पष्ट वजह और नियम बताया जाए। वहीं अगर डिग्री पात्रता के तहत मान्य है, तो परिणाम रोकने का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।उमेश कुमार यादव समेत अभ्यर्थियों ने मांग की है कि पात्र B.Ed ODL अभ्यर्थियों का परिणाम जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

 

अब सबसे बड़ा सवाल—रिजल्ट कब आएगा?

सहायक आचार्य भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के बीच अब यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि B.Ed ODL वालों का रिजल्ट आखिर किस आधार पर रोका गया है और इसे कब जारी किया जाएगा?

फिलहाल अभ्यर्थी JSSC और शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। वहीं इस पूरे विवाद में पारा शिक्षकों की बड़ी संख्या जुड़ी होने के कारण मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक एवं कानूनी महत्व हासिल कर सकता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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