Navratri 2026 Day 4: मां कूष्मांडा की एक मुस्कान से कैसे बना ब्रह्मांड? नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा क्यों है खास? जानें वह रहस्य, आरती और मंत्र, जिनसे जुड़ी हैं गहरी आस्था
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, शुभ मंत्र, आरती, व्रत कथा, प्रिय भोग और पूजा विधि जानें। मां कूष्मांडा की आराधना का महत्व पढ़ें।

Navratri 4th Day Maa Kushmanda Puja: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन आज मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य, ऊर्जा और सकारात्मकता आती है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मंत्र, ध्यान, आरती, प्रिय भोग और व्रत कथा।
मां कूष्मांडा कौन हैं?
मां कूष्मांडा मां दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। नवरात्रि के चौथे दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था और कहीं भी प्रकाश नहीं था, तब देवी ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उनका नाम कूष्मांडा पड़ा।
‘कूष्मांडा’ शब्द को सामान्यतः कुम्हड़े यानी कद्दू से भी जोड़ा जाता है। देवी को कुम्हड़ा प्रिय माना जाता है और पूजा में इसका भोग अर्पित करने की परंपरा है।मां कूष्मांडा को ऊर्जा, प्रकाश, सृजन और जीवनशक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना से भक्तों को सकारात्मक सोच, साहस और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप कैसा है?
धार्मिक ग्रंथों में मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी आठ भुजाओं में विभिन्न दिव्य अस्त्र और वस्तुएं सुशोभित हैं।
• कमंडल
• धनुष
• बाण
• कमल पुष्प
• अमृत से भरा कलश
• चक्र
• गदा
• सिद्धियों और निधियों का प्रतीक जपमाला
मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है। उनका स्वरूप तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। मान्यता है कि उनका निवास सूर्यलोक में है और उनके तेज से समस्त दिशाएं प्रकाशित होती हैं।
Navratri 2026 Day 4: मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
मां कूष्मांडा की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन विशेष फलदायी मानी जाती है। भक्त उनसे सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना के प्रमुख लाभ इस प्रकार बताए गए हैं:
• सुख-समृद्धि: मां की कृपा से घर में सुख और खुशहाली आने की मान्यता है।
• ऊर्जा और उत्साह: देवी को जीवनशक्ति तथा सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
• आरोग्य की कामना: भक्त अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन के लिए उनकी पूजा करते हैं।
• साहस और आत्मविश्वास: मां की आराधना कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की प्रेरणा देती है।
• सृष्टि और सृजन का प्रतीक: देवी की मुस्कान को नई शुरुआत और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
ये धार्मिक आस्थाओं पर आधारित मान्यताएं हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा और मां कूष्मांडा का स्मरण करते हुए विधि-विधान से पूजा करें।
1. मां का ध्यान करें
पूजा स्थल पर मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर देवी का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें।
2. फूल और अक्षत अर्पित करें
मां को लाल या पीले फूल, अक्षत, रोली, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग करें।
3. मां को भोग लगाएं
मां कूष्मांडा को फल, मिठाई, मालपुआ या कुम्हड़े से बना प्रसाद अर्पित कर सकते हैं। भोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार लगाएं।
4. मंत्र जाप और आरती करें
मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप करें, व्रत कथा पढ़ें और श्रद्धापूर्वक आरती करें। अंत में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
मां कूष्मांडा का प्रिय भोग क्या है?
धार्मिक परंपराओं में मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा यानी कद्दू प्रिय माना गया है। इसके अलावा भक्त देवी को फल, मिठाई और मालपुआ का भोग भी अर्पित करते हैं।
पूजा में इन चीजों का भोग लगाया जा सकता है:
• मालपुआ
• फल और मिठाइयां
• कुम्हड़े से बना प्रसाद
• मिश्री और अन्य सात्विक भोग
भोग अर्पित करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखें। प्रसाद को बाद में परिवार और अन्य भक्तों में बांट सकते हैं।
मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान इस ध्यान मंत्र का पाठ किया जाता है।
मंत्र:
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पद्मसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र
देवी की स्तुति के लिए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र का अर्थ: जो देवी समस्त प्राणियों में मां कूष्मांडा के रूप में विराजमान हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।
मां कूष्मांडा का प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
इस मंत्र के माध्यम से भक्त मां कूष्मांडा से कल्याण, सुख और शुभ फल की प्रार्थना करते हैं।
मां कूष्मांडा का बीज मंत्र
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप करें।
मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं कूष्माण्डायै नमः।
श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखें और मां का स्मरण करें।
मां कूष्मांडा की आरती (Maa Kushmanda Ki Aarti)
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आरती करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। यहां प्रचलित आरती के बोल दिए गए हैं।
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिंगला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे। सुख पहुंचाती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
मां कूष्मांडा की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति से पहले चारों ओर अंधकार व्याप्त था। उस समय न समय का स्पष्ट बोध था और न ही संसार का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में था। ऐसी मान्यता है कि मां आदिशक्ति ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की और सृष्टि में प्रकाश का संचार किया।इसी कारण देवी के इस स्वरूप को कूष्मांडा कहा गया। उन्हें सृष्टि की रचनात्मक शक्ति और समस्त ऊर्जा का मूल स्रोत माना जाता है।
मां कूष्मांडा का तेज सूर्य के समान दिव्य बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्यलोक में निवास करने की क्षमता केवल उन्हीं में है। उनकी आभा से समस्त दिशाएं प्रकाशित होती हैं और संसार में जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा का संचार होता है।
देवी के आठ हाथ होने के कारण उन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। उनके हाथों में धारण किए गए अस्त्र-शस्त्र और अन्य वस्तुएं शक्ति, साहस, समृद्धि तथा सिद्धियों का प्रतीक मानी जाती हैं। उनका वाहन सिंह निर्भयता और पराक्रम का प्रतीक है।
मान्यता है कि जो भक्त नवरात्रि के चौथे दिन सच्चे मन से मां कूष्मांडा की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देवी अपने भक्तों को कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं और उनके जीवन में सुख-शांति तथा सकारात्मकता का संचार करती हैं।इसी आस्था के साथ भक्त नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, मंत्र जाप, आरती और व्रत कथा का पाठ करते हैं।
मां कूष्मांडा की पूजा का शुभ रंग
नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा के पूजन में पीले और सुनहरे रंग को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहन सकते हैं और पूजा में पीले फूल अर्पित कर सकते हैं। पीला रंग ऊर्जा, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।हालांकि, पूजा में किसी विशेष रंग के वस्त्र पहनना अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा और भक्ति को ही सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
मां कूष्मांडा की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
• पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
• मां को सात्विक भोग अर्पित करें।
• मंत्रों का जाप शांत मन और एकाग्रता के साथ करें।
• व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें।
• पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करें।
मां कूष्मांडा की आराधना से मिलता है नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश
शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की उपासना को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनाकार, प्रकाश की स्रोत और जीवन ऊर्जा की प्रतीक माना गया है। उनकी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की कथा भक्तों को आशा, उत्साह और नई शुरुआत का संदेश देती है।इस पावन अवसर पर मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करें, उनके मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा आरोग्य की कामना करें। मां कूष्मांडा सभी के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता बनाए रखें।











