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झारखंड: ….जब मंत्रीजी को आया एक फ्राड का कॉल, खुद रक्षामंत्री ने बताया फर्जी कॉल से उन्होंने खुद को कैसे बचाया, लोगों से कही ये बात…

Jharkhand: ...When the minister received a fraudulent call, the Defence Minister himself explained how he saved himself from the fake call and told the people...

रांची/12.01.25। साइबर अपराधी किसी से नहीं डरते है। कमाल की बात ये है कि साइबर अपराधी के जाल में आम आदमी ही नहीं, बल्कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी निशाने पर हैं। इसका ताजा उदाहरण केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ हैं, जिन्हें साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का शिकार बनाने की कोशिश की। हालांकि उनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते यह प्रयास विफल हो गया। यह घटना न सिर्फ साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

मंत्री तक पहुंचा साइबर फ्रॉड का कॉल

साइबर अपराध पर एक सेमिनार के दौरान रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें फोन कर धोखाधड़ी की कोशिश की। ठगों ने खुद को किसी परिचित के रूप में पेश करते हुए उनके दिल्ली में रह रहे बड़े भाई से जुड़ी जानकारी का हवाला दिया। इतना ही नहीं, ठगों ने धमकी दी कि यदि इस कॉल की जानकारी किसी को दी गई तो उनका मंत्री पद तक चला जाएगा।

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सतर्कता से नाकाम हुई ठगी की कोशिश

संजय सेठ ने बताया कि जैसे ही उन्हें कॉल पर संदेह हुआ, उन्होंने बिना देरी किए उस कॉल को कॉन्फ्रेंस कॉल में बदलते हुए एसएसपी को भी जोड़ लिया। पुलिस अधिकारी के जुड़ते ही साइबर ठग पलक झपकते ही कॉल काटकर फरार हो गया। मंत्री ने कहा कि यदि वे थोड़ा भी डर जाते या जल्दबाजी में कोई कदम उठाते, तो मामला गंभीर हो सकता था।

लोगों को किया सतर्क

अपने अनुभव के आधार पर रक्षा राज्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि साइबर ठग बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को शिकार बनाते हैं। वे कभी वीडियो कॉल, कभी व्हाट्सएप फोटो, तो कभी ईमेल या फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक, वीडियो कॉल या संदिग्ध संदेश से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी वर्षों की गाढ़ी कमाई को मिनटों में खत्म कर सकती है।

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झारखंड में बढ़ रही डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं

मंत्री संजय सेठ ने चिंता जताते हुए कहा कि झारखंड में खासकर एमएसएमई सेक्टर में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा में निवेश की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और असुरक्षित नेटवर्क का उपयोग इन अपराधों को बढ़ावा दे रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नए-नए तरीकों से ठग लोगों को आसानी से निशाना बना रहे हैं।

एमएसएमई सेक्टर सबसे ज्यादा संवेदनशील

रक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर देश की आर्थिक मजबूती की रीढ़ है, लेकिन सीमित संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण यह क्षेत्र साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन गया है। उन्होंने उद्यमियों से अपील की कि वे साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दें और अपने कर्मचारियों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करें।

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गोल्डन टाइम का महत्व

राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच बीएसएनएल झारखंड और साइबर पीस फाउंडेशन द्वारा रांची में ‘नेशनल यूथ एआई साइबर सुरक्षा कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साइबर पीस फाउंडेशन के संस्थापक और ग्लोबल अध्यक्ष मेजर विनीत कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड का शिकार होने के बाद शुरुआती कुछ घंटे, जिसे ‘गोल्डन टाइम’ कहा जाता है, बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस समय सही एजेंसी को सूचना दी जाए, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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