धनबाद में मजदूर की बेटी बनेगी डॉक्टर: पहले ही प्रयास में पूनम ने NEET में मारी बाजी, धनबाद डीसी उठायेंगे पढ़ाई का पूरा खर्चा, जानिये कितनी मिली थी रैंकिंग
धनबाद की दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने पहले प्रयास में 582 अंकों के साथ NEET क्वालीफाई किया। अब प्रशासन उसके MBBS की पढ़ाई का खर्च उठाने की पहल कर रहा है।

धनबाद। घर की आर्थिक हालत भले ही कमजोर थी, लेकिन सपने बड़े थे। पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी हैं। ऐसे परिवार से आने वाली धनबाद की पूनम कुमारी ने अपनी मेहनत के दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना उसने बचपन से देखा था। पूनम ने पहले ही प्रयास में NEET क्वालीफाई किया और अब धनबाद के SNMMCH में एमबीबीएस की पढ़ाई करेगी। खास बात यह है कि आर्थिक परेशानी के कारण डॉक्टर बनने का सपना अधूरा न रह जाए, इसके लिए धनबाद प्रशासन ने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने की पहल की है।
बिना महंगी कोचिंग के हासिल की NEET में सफलता
धनबाद के बरमसिया स्थित भूदा की रहने वाली पूनम ने SSLNT सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही पूनम ने इंटर की परीक्षा में करीब 98 प्रतिशत अंक हासिल किए।
डॉक्टर बनने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने के लिए उसने NEET की तैयारी शुरू की। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगे कोचिंग संस्थान में पढ़ाई कराई जा सके। इसके बावजूद पूनम ने स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी सेल्फ स्टडी को हथियार बनाया।
दिन-रात मेहनत के बाद जब NEET का परिणाम आया तो पूनम की मेहनत सफल हो गई। उसने 582 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 16,972 और कैटेगरी रैंक 193 प्राप्त की। सबसे खास बात यह रही कि उसने पहले प्रयास में ही NEET क्वालीफाई कर लिया।
अब SNMMCH में डॉक्टर बनने की पढ़ाई
NEET काउंसलिंग के बाद पूनम को SNMMCH धनबाद में एमबीबीएस की सीट मिली। सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उसके परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि थी।लेकिन दाखिले की खुशी के साथ परिवार के सामने एक बड़ी चिंता भी थी। एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च सीमित आमदनी वाले परिवार के लिए आसान नहीं था।
पूनम के पिता धर्मू गोराई दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि मां पिपू देवी गृहिणी हैं। परिवार की आमदनी इतनी नहीं है कि आसानी से मेडिकल की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जा सके। ऐसे में बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई थी।
धनबाद डीसी ने आगे बढ़कर की मदद
पूनम की सफलता और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने छात्रा की मदद की पहल की।डीसी ने पूनम को अडॉप्ट करते हुए उसकी मेडिकल शिक्षा से जुड़े खर्च को उठाने का निर्णय लिया है। इसके तहत एमबीबीएस प्रथम वर्ष की फीस समेत एक साल की राशि मेडिकल कॉलेज में जमा करा दी गई है।
पढ़ाई के दौरान रहने और खाने समेत अन्य जरूरी खर्च में भी सहयोग करने की पहल की गई है।प्रशासन की यह मदद पूनम और उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। अब आर्थिक तंगी के कारण उसकी मेडिकल पढ़ाई रुकने का खतरा काफी हद तक दूर हो गया है।
मुख्यमंत्री ने भी दी बधाई
पूनम की सफलता पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और दूसरे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी लगातार आगे बढ़ रहे हैं और अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं।उन्होंने यह संदेश भी दिया कि हुनर ही इंसान की असली पहचान है, गरीबी नहीं।
पूनम की कहानी इसी बात की मिसाल है। दिहाड़ी मजदूर परिवार से निकलकर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाली बेटी ने बिना महंगी कोचिंग के NEET में सफलता हासिल की और अब डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ चुकी है।
संघर्ष से सफलता तक पहुंची कहानी
पूनम की कहानी सिर्फ NEET में मिली सफलता की कहानी नहीं है। यह उस संघर्ष की कहानी है, जिसमें संसाधन कम होने के बावजूद उसने पढ़ाई को अपनी ताकत बनाया।एक तरफ पिता रोज कमाकर परिवार चलाते रहे और दूसरी तरफ बेटी ने अपनी पढ़ाई के लिए लगातार मेहनत की। अब SNMMCH में एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ पूनम के डॉक्टर बनने का सपना एक कदम और करीब पहुंच गया है। प्रशासन की मदद ने इस सपने को आर्थिक मजबूरी से बाहर निकालने का रास्ता भी खोल दिया है।












