झारखंड हाईकोर्ट के सख्त तेवर: ACP लाभ पर 4 हफ्ते की मोहलत, डीजीपी को हाजिर होने का आदेश, सहायक आचार्य भर्ती पर भी कोर्ट नाराज
Jharkhand High Court takes a tough stance: 4 weeks' extension on ACP benefits, DGP ordered to appear, court also displeased with Assistant Professor recruitment

झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिसकर्मियों को ACP लाभ देने में देरी और सहायक आचार्य नियुक्ति में गड़बड़ी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार, DGP और JSSC को स्पष्ट निर्देश देते हुए जवाबदेही तय करने को कहा है।
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रांची/20.3.26। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने एक ओर जहां पुलिसकर्मियों को ACP (Assured Career Progression) लाभ देने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई, वहीं सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को कड़ी फटकार लगाई।
ACP लाभ पर सख्त निर्देश, DGP को चेतावनी
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में झारखंड पुलिस के ACP लाभ से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई हुई।सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक (DGP) को स्पष्ट निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर पूर्व आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होता है, तो DGP को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर कारण बताना होगा।
यह मामला झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को ACP लाभ दिए जाने की मांग की गई थी।पहले एकल पीठ ने सरकार को लाभ देने का निर्देश दिया था, लेकिन आदेश के बावजूद पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
अदालत की नाराजगी: आदेश के बावजूद पालन क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त दिखा। कोर्ट ने यह संकेत दिया कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत कार्रवाई भी की जा सकती है।यह स्पष्ट संदेश है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सहायक आचार्य भर्ती में JSSC को फटकार
वहीं, जस्टिस आनंद सेन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई हुई।इस दौरान अदालत ने JSSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि एक पद को फिलहाल सुरक्षित (reserved) रखा जाए, ताकि याचिका पर अंतिम निर्णय तक स्थिति यथावत बनी रहे।यह मामला याचिकाकर्ता विनोद कुमार साहू से जुड़ा है। उनके वकील चंचल जैन ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पास दो TET प्रमाणपत्र हैं।वर्ष 2013 में उन्होंने 60% से अधिक अंक प्राप्त किए थे, जबकि 2016 में उनके अंक 60% से कम थे।









