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झारखंड हाईकोर्ट : प्रमोशन-नियुक्ति मामले में याचिका पर सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार पर देरी…

Jharkhand High Court: Hearing on the petition in the promotion-appointment case completed, the High Court reserved the decision, during the hearing the court accused the state government of delay...

झारखंड हाई कोर्ट में नियुक्ति और प्रोन्नति नियमावली से जुड़े अहम मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और नियमावली में हो रही देरी पर राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई है।
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रांची/24.3.26। झारखंड में प्रमोशन व नियुक्ति संबंधी याचिका पर सुनवाई पूरी हो गयी है। हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जल्द ही कोर्ट इस मामले में फैसला सुनायेगा। दरअसल पूरा मामला झारखंड में जूनियर इंजीनियर (JE) की नियुक्ति और प्रोन्नति से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक इस मामले में लंबे समय से लंबित विवाद पर झारखंड हाई कोर्ट में चल रही अहम सुनवाई पूरी हो गई है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले को राज्य के तकनीकी कर्मियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी सेवा शर्तों और भविष्य की पदोन्नति पर पड़ने वाला है।

जानकारी के मुताबिक याचिका कनीय अभियंता (JE) की नियुक्ति एवं प्रोन्नति से संबंधित स्पष्ट नियमावली के अभाव से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से राज्य में इस संबंध में कोई ठोस और स्पष्ट नियम लागू नहीं होने के कारण इंजीनियरों के बीच असंतोष बना हुआ है। इसी को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिसमें न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई।

अदालत ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर अब तक ठोस नियमावली का अभाव गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने यह भी माना कि स्पष्ट नियमों के अभाव में पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है।

अदालत ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई थी। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार नियमावली लागू करने में अनावश्यक देरी कर रही है और बार-बार विभिन्न विभागों से परामर्श का हवाला देकर प्रक्रिया को टाल रही है। कोर्ट ने विशेष रूप से विधि विभाग, महाधिवक्ता और वित्त विभाग के नाम लेकर कहा था कि इनसे परामर्श लेना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसे बहाना बनाकर प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि जल्द ही नियमावली तैयार कर लागू नहीं की गई, तो इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जा सकता है। यह टिप्पणी इस बात का संकेत थी कि कोर्ट इस मामले को लेकर गंभीर है और अब और देरी को स्वीकार नहीं करेगा।हालांकि, बाद की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को यह भरोसा दिलाया गया था कि नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द लागू कर दिया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा था कि सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर मसौदा तैयार किया जा रहा है।इसके बावजूद, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी नियमावली को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसी कारण एक बार फिर मामला कोर्ट में गंभीरता से उठा और सुनवाई के दौरान इस पर विस्तार से बहस हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नियमावली के अभाव में न केवल पदोन्नति रुकी हुई है, बल्कि कई मामलों में नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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