झारखंड शिक्षक नियुक्ति विवाद: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 2034 शिक्षकों की नहीं हुई नियुक्ति, अब हाईकोर्ट ने दायर हुई अवमानना याचिका, 10 साल बाद भी…
Jharkhand Teacher Recruitment Dispute: Despite the High Court's Order, 2,034 Teachers Remain Unappointed; Contempt Petition Filed in High Court—Even After 10 Years...

झारखंड में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 2034 पदों पर नियुक्ति नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की है।
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रांची। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पायी है। अब इस मामले में एक बार फिर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। प्रभावित शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की है। झारखंड में हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2016 में शुरू हुई स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में 2034 पद अब भी रिक्त हैं। मामला अब एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां अभ्यर्थियों ने न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है।दरअसल, 1 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने 258 रिट याचिकाओं की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि इन रिक्त पदों को याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों से भरा जाए।
कोर्ट ने इसके लिए समयसीमा भी तय की थी और अभ्यर्थियों को आठ सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज आयोग को सौंपने का निर्देश दिया गया था।अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा भी कर दिए, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इससे आक्रोशित होकर 200 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी है।
यह याचिका मनोज कुमार गुप्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने दायर की है।इस मामले में जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने पहले ही महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था। कोर्ट ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था।
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मेटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने और सरकार को छह सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने छह महीने के भीतर 2034 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था।हालांकि, इस प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न हो गई, जब जस्टिस डॉ. एसएन पाठक ने वन मैन कमीशन का अध्यक्ष बनने में असमर्थता जताई।
इसके बाद नए नामों पर विचार शुरू हुआ और अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है।इस बीच राज्य सरकार और आयोग ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील याचिकाएं भी दायर की हैं। उनका तर्क है कि आदेश में कई विसंगतियां हैं, हालांकि अभी तक इस आदेश पर कोई रोक नहीं लगी है।गौरतलब है कि यह पूरा विवाद वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें 17,786 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। मेरिट और चयन प्रक्रिया में कथित विसंगतियों के कारण कई योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए थे, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया।







