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झारखंड : बर्खास्त अफसर आशुतोष कुमार को मिली थोड़ी राहत, राज्य सरकार ने बर्खास्तगी आदेश लिया वापस, लेकिन सस्पेंशन बना रहेगा…

Jharkhand: Dismissed officer Ashutosh Kumar gets some relief, state government withdraws dismissal order, but suspension remains...

रांची/29.5.26। झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आशुतोष कुमार की बर्खास्तगी रद्द हो गयी है। राज्य सरकार ने बर्खास्तगी आदेश वापस ले लिया है। यह फैसला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लिया गया है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अधिकारी को सेवा में पुनर्बहाल नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें 10 फरवरी 2021 से निलंबित माना जाएगा।

आपको बता दें कि आशुतोष कुमार झारखंड प्रशासनिक सेवा के चतुर्थ सीमित बैच के अधिकारी हैं। उनके खिलाफ चतरा जिले में पदस्थापना के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर पहले उन्हें निलंबित किया गया था और बाद में विभागीय कार्रवाई के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

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दरअसल आशुतोष कुमार चतरा जिले में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही वे प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। इसी दौरान उनके कार्यकाल में करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी का मामला सामने आया था। जुलाई 2018 में चतरा के तत्कालीन उपायुक्त ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर मुख्यालय भेजा था।

आरोप था कि उनके कार्यकाल में कुल 43 बैंक ट्रांसफर के माध्यम से लगभग 6.48 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। विभागीय स्तर पर इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया था। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। इसके अलावा आशुतोष कुमार पर एक और गंभीर आरोप लगाया गया था। बताया गया कि नवंबर 2017 में कार्यालय में आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें रोकड़ पंजी और चेकबुक जल गए थे।

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आरोप था कि इस अग्निकांड की जानकारी वरीय अधिकारियों को समय पर नहीं दी गई। इसे प्रशासनिक लापरवाही माना गया और विभागीय जांच में इसे भी गंभीर बिंदु के रूप में शामिल किया गया। इन आरोपों को गंभीर मानते हुए जुलाई 2018 में सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। जांच पूरी होने के बाद सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया था।

बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ आशुतोष कुमार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड सरकार को नया प्रशासनिक निर्णय लेना पड़ा और बर्खास्तगी का आदेश वापस लेना पड़ा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अधिकारी को पूरी तरह राहत नहीं दी गई है। उन्हें सेवा में बहाल करने के बजाय 10 फरवरी 2021 से निलंबित माना जाएगा।

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इसका मतलब है कि उनके खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।कानूनी जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा बर्खास्तगी आदेश रद्द किए जाने के बाद सरकार के पास प्रशासनिक स्थिति को नए सिरे से तय करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। वहीं दूसरी ओर निलंबन जारी रहने से यह संकेत मिलता है कि सरकार मामले को अभी पूरी तरह समाप्त मानने के पक्ष में नहीं है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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