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महंगाई का एक और बड़ा झटका : खाने के तेल के भी बढ़ गये हैं दाम, अब बिस्कुट-नमकीन भी बढ़ाएंगे जेब का बोझ, जानिये कितनी बढ़ गयी है कीमत

Another big blow of inflation: The price of edible oil has also increased, now biscuits and namkeen will also increase the burden on the pocket, find out how much the price has increased.

नई दिल्ली/29.5.26। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद अब खाने के तेल समेत कई जरूरी वस्तुएं महंगी होने लगी हैं। खासतौर पर खाद्य तेलों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

पिछले चार महीनों में रिफाइंड खाद्य तेल की महंगाई दर दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। सरसों तेल सहित अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कई ब्रांडेड खाना पकाने वाले तेल अब पैकिंग और कैटेगरी के हिसाब से 110 रुपये से लेकर 207 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहे हैं।

पहले से पेट्रोल-डीजल और घरेलू खर्चों से परेशान मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह नई महंगाई अतिरिक्त बोझ बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य तेलों की कीमत बढ़ने का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे FMCG सेक्टर को प्रभावित करता है।

दरअसल, खाद्य तेल का इस्तेमाल सिर्फ खाना बनाने में ही नहीं बल्कि बिस्कुट, नमकीन, चिप्स, फ्रोजन फूड, रेडी-टू-ईट उत्पाद, इंस्टेंट मील और बेकरी आइटम जैसे कई पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में तेल की लागत बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ रही है।

अब इसका असर बाजार में भी दिखने लगा है। कई FMCG कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में बिस्कुट, नमकीन, स्नैक्स, बेकरी प्रोडक्ट्स और अन्य पैकेटबंद खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और इजाफा हो सकता है।

यह संकट लोगों की सोच से कहीं बड़ा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई कमोडिटी मार्केट प्रभावित हो रहे हैं और खाद्य तेल सबसे ज्यादा प्रभावित श्रेणी में शामिल है।

उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ खाद्य तेल खरीद लागत पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, लेमिनेशन और कागज की कीमतें भी बढ़ रही हैं। ये सभी FMCG कंपनियों के कुल उत्पादन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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