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5 शिक्षकों पर FIR: 13 साल तक फर्जी दस्तावेजों पर लेते रहे सैलरी, विभाग को भनक तक नहीं लगी, अब होगी बर्खास्तगी, अब तक 80 पकड़ाये

Teacher FIR।  फर्जी प्रमाण पत्र मामले में शिक्षकों पर गाज गिरी है। विभाग की तरफ से पांच शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज करायी गयी है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में हड़कंप मचा है। मामला बिहार के नालंदा जिले का है, जहां नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।

दरअसल पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही जांच में पांच और शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इन शिक्षकों पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है। निगरानी विभाग की जांच में सबसे पहले हिलसा प्रखंड के पचरुखिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका शारदा रानी का मामला सामने आया।

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बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 में नियुक्ति के दौरान उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से जारी बीएड की डिग्री प्रस्तुत की थी। जांच के दौरान विश्वविद्यालय से प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया गया, जिसमें संबंधित दस्तावेज फर्जी पाया गया। इसके बाद हिलसा थाना में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

वहीं, राजगीर और सिलाव प्रखंड के चार अन्य शिक्षकों के दस्तावेज भी जांच में संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें राजगीर प्रखंड के अंडवस मध्य विद्यालय के मो. जाहिद परवेज, सिलाव प्रखंड के धामर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के सुबोध कुमार, पचवारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के नीरज कुमार तथा नानंद मध्य विद्यालय के मणि शंकर शर्मा शामिल हैं। सभी के खिलाफ संबंधित थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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मिली जानकारी के अनुसार नालंदा जिले में अब तक कुल 80 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करने के आरोप में मामले दर्ज हो चुके हैं। सत्यापन के दौरान कई प्रमाणपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

राजगीर अनुमंडल के डीएसपी संजित कुमार गुप्ता ने बताया कि पुलिस केवल शिक्षकों की भूमिका ही नहीं, बल्कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले गिरोह और बिचौलियों की भी तलाश कर रही है। जांच के दौरान ऐसे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी नौकरियों में इस्तेमाल करा रहे थे।

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उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को भी सूचना भेज दी गई है और आरोपित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर फर्जी प्रमाणपत्र रैकेट से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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