JTET के भाषा विवाद पर अब मुख्यमंत्री लेंगे आखिरी फैसला, मंत्रियों की बैठक में नहीं बनी समिति, हिंदी को अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव…जानिए किस मंत्री ने क्या कहा…
The Chief Minister will now take the final decision on the JTET language dispute. No committee was formed at the ministers' meeting. A proposal was also made to make Hindi compulsory. Find out what each minister said.

JTET में भोजपुरी, मगही और अंगिका को लेकर विवाद गहराया, मंत्रियों की समिति नहीं बना सकी सहमति
रांची/4.6.26। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भाषा विवाद फिलहाल सुलझता दिख नहीं रहा है। अब मुख्यमंत्री इस पर आखिरी फैसला लेंगे। इससे पहले भाषा विवाद सुलझाने के लिए बनी समिति की बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को शामिल करने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। इस विवाद को सुलझाने के लिए गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति की अहम बैठक भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अब समिति अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री
Hemant Soren को सौंपेगी, जिनका निर्णय अंतिम माना जाएगा।
बैठक में बंटे मंत्री, नहीं बन सकी सहमति
इससे पहले बुधवार को हुई बैठक में समिति के सदस्य दो गुटों में बंटे नजर आए। एक पक्ष भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने के समर्थन में रहा, जबकि दूसरा पक्ष इन भाषाओं को शामिल करने का विरोध करता रहा।
समिति के संयोजक Radhakrishna Kishore, मंत्री Deepika Pandey Singh और Sanjay Singh Yadav इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में रहे। वहीं Sudivya Kumar Sonu, Yogendra Prasad Mahato, Shilpi Neha Tirkey और Hafizul Hasan Ansari ने इसका विरोध किया।
मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी रिपोर्ट
समिति के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने बैठक के बाद कहा कि यह इस मुद्दे पर अंतिम बैठक थी। सभी सदस्यों को एक-दो दिन के भीतर अपनी लिखित राय देने का समय दिया गया है। इसके बाद पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अंतिम फैसला लेंगे कि इन भाषाओं को जेटेट में शामिल किया जाए या नहीं।
हिंदी को अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव
बैठक के दौरान राधाकृष्ण किशोर ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं किया जाता है, तो जेटेट के पेपर-2 में हिंदी को अनिवार्य विषय बनाया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य की परीक्षाओं में सभी क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
विरोध करने वाले मंत्रियों की दलील
विरोध कर रहे मंत्रियों का कहना है कि झारखंड का गठन जनजातीय और क्षेत्रीय पहचान को संरक्षित करने के उद्देश्य से हुआ था। ऐसे में उन भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो राज्य की मूल क्षेत्रीय भाषाएं हैं। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जब स्कूलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका की पढ़ाई नहीं होती, तो उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल करने का औचित्य नहीं बनता।
वहीं हफिजुल हसन अंसारी ने तर्क दिया कि ये भाषाएं मुख्य रूप से बिहार से जुड़ी मानी जाती हैं और बिहार की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इन्हें शामिल नहीं किया गया है।
समर्थन में भी मजबूत तर्क
दूसरी ओर दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि हर भाषा का सम्मान होना चाहिए और जिन क्षेत्रों में ये भाषाएं बोली जाती हैं, वहां के अभ्यर्थियों को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के फैसले पर
समिति में सहमति नहीं बनने के बाद अब पूरा मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में पहुंच गया है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री का फैसला यह तय करेगा कि जेटेट परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका को स्थान मिलेगा या नहीं।









