Jharkhand High Court: दो मासूम बेटों की हत्या में दोषी शमा परवीन की उम्रकैद बरकरार, अपील खारिज
झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर में दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में दोषी शमा परवीन की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।

Jharkhand High Court: दो मासूम बेटों की हत्या में दोषी शमा परवीन की उम्रकैद बरकरार, अपील खारिज
रांची। दो मासूम बेटों की हत्या करने वाली मां को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने हत्या की दोषी मां को आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर में वर्ष 2013 में अपने दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई शमा परवीन की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है।
जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए शमा परवीन की अपील खारिज कर दी।निचली अदालत ने शमा परवीन को दोनों बच्चों की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने मामले में उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
2013 में नाले में मिले थे दोनों बच्चों के शव
ये पूरा मामला जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 19 मई 2013 की शाम शमा परवीन अपने चार वर्षीय बेटे कासिफ उमर और दो वर्षीय बेटे शरीफ उमर के साथ मंजूर आलम के घर गई थी। रात में जब वह घर नहीं लौटी तो उसके पति ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।
अगली सुबह शमा सड़क किनारे बेसुध हालत में मिली। इसी दौरान पड़ोसी ने दोनों बच्चों के नाले में पड़े होने की जानकारी दी। दोनों बच्चों के शव कपड़े में लिपटे हुए मिले थे। उनके शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए थे।
घटनास्थल से मिले थे खून के निशान और अन्य सामान
पुलिस जांच के दौरान घटनास्थल से खून के निशान, खून से सना कपड़ा और अन्य सामान बरामद किए गए। जांच अधिकारी के मुताबिक, शमा के कपड़ों और घटनास्थल से बरामद साड़ी के पल्लू के बीच समानता पाई गई थी। पुलिस ने शमा के कथित स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर खून लगी ब्लेड और चूड़ियां भी बरामद करने का दावा किया था। हालांकि, मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और अभियोजन पक्ष के कई गवाह बाद में अपने बयानों से मुकर गए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत की बात
मामले की जांच में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने दोनों बच्चों की मौत जहर के कारण होने की बात कही थी। वहीं शरीफ के शरीर पर गर्दन और दोनों हाथों पर कट के निशान मिले थे। कासिफ के शरीर पर रासायनिक जलने के निशान पाए गए थे।इन परिस्थितियों के आधार पर अभियोजन ने मामले को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर साबित करने का प्रयास किया।
शमा ने हत्या से किया था इनकार
शमा परवीन ने हाई कोर्ट के समक्ष हत्या के आरोपों से इनकार किया था। उसका कहना था कि वह दोनों बच्चों के साथ मंजूर आलम के घर कर्ज की रकम और गिरवी रखे गहने वापस लेने गई थी।उसने आरोप लगाया था कि मंजूर आलम ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और बच्चों को पेप्सी पिलाने के बाद उनकी हत्या कर दी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उसकी इस सफाई को स्वीकार नहीं किया।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी को कोर्ट ने माना अहम
खंडपीठ ने कहा कि शमा का बच्चों के साथ मंजूर आलम के घर जाना उसके अपने बयान से भी साबित होता है। इसके अलावा कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर खून लगी ब्लेड की बरामदगी, बच्चों को लपेटने वाले कपड़े का शमा के पहने हुए कपड़े से मेल और अन्य परिस्थितियां उसके खिलाफ जाती हैं।
हाई कोर्ट ने माना कि मामले में सामने आई परिस्थितियों की पूरी कड़ी आरोपी की भूमिका की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करती है। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और शमा परवीन की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी।












