IAS पूजा सिंघल को झटका: सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली सीनियर IAS को कोई राहत, PMLA मामले में निचली अदालत की कार्यवाही जारी

नई दिल्ली। झारखंड कैडर की सीनियर आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी फिलहाल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत द्वारा मामले में अपराध का संज्ञान लेने वाले आदेश को इस स्तर पर रद्द करने से इनकार कर दिया।
इसके साथ ही उनके खिलाफ PMLA मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। पूजा सिंघल ने निचली अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की 25 सितंबर की कॉज लिस्ट में भी यही तीन सदस्यीय पीठ दर्ज है।
अभियोजन मंजूरी पर क्या है विवाद?
पूजा सिंघल की ओर से दलील दी गई कि एक लोक सेवक के खिलाफ कथित आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े अपराध में मुकदमा चलाने के लिए CrPC की धारा 197 के तहत पूर्व अभियोजन मंजूरी जरूरी थी। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर निचली अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती दी।
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कहा गया कि मामले में विशेष अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है और कार्यवाही काफी आगे बढ़ चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन मंजूरी के सवाल को इस स्तर पर अंतिम रूप से तय करने के बजाय इसे कानून और तथ्यों से जुड़ा मुद्दा माना। अदालत के मुताबिक यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि कथित अपराध के समय संबंधित अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थीं या नहीं। इस पहलू का फैसला ट्रायल के उचित चरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है।
19 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामदगी का मामला
पूजा सिंघल के खिलाफ मामला झारखंड के मनरेगा से जुड़े कथित घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है। मई 2022 में ED की कार्रवाई के दौरान उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़े ठिकाने से करीब 19.76 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच आगे बढ़ाई।
पूजा सिंघल ने निचली अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती देते हुए पहले झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान आदेश को इस स्तर पर रद्द नहीं किए जाने के बाद PMLA मामले की ट्रायल प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। अभियोजन मंजूरी का सवाल भी आगे की सुनवाई में साक्ष्यों और मामले के तथ्यों के आधार पर तय किया जा सकता है।












