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अंचलाधिकारी बर्खास्त: फर्जी मैट्रिक प्रमाण पत्र राज्य सरकार का बड़ा एक्शन, अंचलाधिकारी को राज्य सरकार ने किया बर्खास्त…

Block Development Officer dismissed: Big action by the state government on fake Matriculation certificate, Block Development Officer dismissed by the state government...

जाली मैट्रिक प्रमाण-पत्र के गंभीर आरोपों में सरकार ने अंचलाधिकारी प्रिंस राज को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया। जांच में दो नाम और दो अलग जन्मतिथियों के आधार पर परीक्षा देने का तथ्य सामने आया था।
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Big News/21.2.26 :एक बड़ी खबर आ रही है। अंचलाधिकारी रहे प्रिंस राज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सरकार ने ये एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पूर्व अंचलाधिकारी (CO) प्रिंस राज की नौकरी चली गयी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया गया, जिसके पश्चात संबंधित विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।सरकारी स्तर पर इसे शून्य सहिष्णुता नीति (Zero Tolerance Policy) के तहत की गई कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय की व्यापक चर्चा है।

दो नाम और दो जन्मतिथियों का खुलासा

प्रिंस राज पर आरोप था कि उन्होंने मैट्रिक परीक्षा दो अलग-अलग नामों और दो अलग जन्मतिथियों के आधार पर दी थी। विशेष निगरानी जांच (Special Vigilance Inquiry) के दौरान इस मामले का खुलासा हुआ। जांच एजेंसियों को दस्तावेजों के सत्यापन में विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद विस्तृत पड़ताल शुरू की गई।जांच में यह पाया गया कि शैक्षणिक रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के बीच गंभीर अंतर मौजूद थे। यही तथ्य आगे चलकर कार्रवाई का आधार बना।

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मैट्रिक प्रमाण-पत्र पहले ही हो चुका था रद्द

मामले की जांच के क्रम में Bihar School Examination Board (BSEB) ने वर्ष 2006 का प्रिंस राज का मैट्रिक प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया था। बोर्ड ने दस्तावेजों की समीक्षा के बाद प्रमाण-पत्र को अमान्य घोषित किया।शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के रद्द होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही थी। विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की गई, जो अंततः बर्खास्तगी तक पहुंची।

विशेष निगरानी जांच में सामने आया मामला

इस पूरे प्रकरण का खुलासा विशेष निगरानी जांच के दौरान हुआ था। सूत्रों के अनुसार, नियमित सत्यापन प्रक्रिया में कुछ संदिग्ध तथ्यों की जानकारी मिली, जिसके बाद जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया।विशेष जांच में दस्तावेजों की क्रॉस-चेकिंग, रिकॉर्ड मिलान और बोर्ड स्तर पर सत्यापन कराया गया। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद सरकार ने कठोर कदम उठाया।

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जाली प्रमाण-पत्र पर लगातार सख्ती

हाल के वर्षों में जाली प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार और परीक्षा बोर्डों ने सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा किया है। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डेटा मिलान जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।प्रिंस राज के खिलाफ की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई को इसी सख्त रुख का हिस्सा माना जा रहा है।

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