Health News: घंटों मोबाइल चलाना और ऑफिस में बैठे रहना पड़ सकता है भारी, पैरों की नसों में जम सकता है खून का थक्का; डॉक्टरों ने किया अलर्ट

Health Desk। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस में घंटों काम करना, लगातार मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन देखना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना आदत सी बन गई है। ऑनलाइन गेमिंग से लेकर OTT प्लेटफॉर्म पर लगातार शो देखने तक, लोग अपने दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे गुजार रहे हैं। यही नहीं आफिस में भी लंबे समय तक बैठने की मजबूरी रहती है।
लेकिन क्या आपको पता है, यह आदत सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहने से पैरों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और कुछ लोगों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) का जोखिम बढ़ सकता है।
वैस्कुलर विशेषज्ञों ने इस तरह की जीवनशैली को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर उन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है, जो डेस्क जॉब करते हैं या कई घंटों तक लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठे रहना रक्त के थक्के बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।
क्या है DVT, जो बन सकता है गंभीर खतरा?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) एक ऐसी मेडिकल स्थिति है, जिसमें शरीर की गहरी नसों में खून का थक्का बन जाता है। यह समस्या आमतौर पर पैरों में देखने को मिलती है। थक्का बनने से रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और पैर में दर्द, सूजन, गर्माहट या त्वचा के रंग में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
इस स्थिति को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यदि खून का थक्का अपनी जगह से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) नामक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है और कुछ मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है।हालांकि, लंबे समय तक बैठने वाले हर व्यक्ति को DVT नहीं होता। इसका जोखिम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, गतिविधियों और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करता है।
युवाओं में भी क्यों बढ़ रही है चिंता?
पहले DVT को अक्सर अधिक उम्र, अस्पताल में भर्ती रहने या सर्जरी के बाद होने वाली समस्या के रूप में देखा जाता था। लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाली जीवनशैली के कारण युवाओं में भी इसके जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी है।
डेस्क जॉब, लगातार ऑनलाइन गेमिंग, घंटों वेब सीरीज देखना और शारीरिक गतिविधियों की कमी ऐसी आदतें हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से पैरों की मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है। इससे पैरों से रक्त को वापस हृदय की ओर पहुंचाने में मदद करने वाली मांसपेशियों की पंपिंग क्रिया भी कम सक्रिय रहती है।
वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. तापिश साहू के अनुसार, ओपीडी में युवा मरीजों के बीच भी ऐसी जीवनशैली से जुड़ी चिंताएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति में DVT होने की पुष्टि केवल लक्षणों या स्क्रीन टाइम के आधार पर नहीं की जा सकती। इसके लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।
शोध में लंबे समय तक बैठे रहने को लेकर क्या सामने आया?
Scientific Reports में प्रकाशित एक शोध में लंबे समय तक बैठे रहने और वीनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (VTE) के जोखिम के बीच संबंध की जानकारी सामने आई है। VTE में डीप वेन थ्रोम्बोसिस और पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी स्थितियां शामिल होती हैं।
उपलब्ध शोध विवरण के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत वाले लोगों में VTE का जोखिम 24 प्रतिशत अधिक पाया गया। हालांकि, इस आंकड़े की सही व्याख्या के लिए संबंधित अध्ययन की आबादी, बैठने की अवधि और शोध पद्धति को देखना जरूरी है। यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि स्क्रीन देखने से सीधे DVT होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के साथ मोटापा, पहले DVT हो चुका होना, हाल की सर्जरी, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना और कुछ अन्य चिकित्सकीय स्थितियां भी रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं।
लंबे समय तक बैठते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपका ज्यादातर समय ऑफिस की कुर्सी या स्क्रीन के सामने गुजरता है, तो कुछ आदतों में बदलाव करके निष्क्रियता को कम किया जा सकता है।
• बीच-बीच में उठकर चलें: लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें। नियमित अंतराल पर उठकर कुछ मिनट टहलें।
• पैरों को सक्रिय रखें: बैठे-बैठे टखनों को ऊपर-नीचे करना और पैरों को हिलाना मांसपेशियों की गतिविधि बनाए रखने में मदद कर सकता है।
• नियमित व्यायाम करें: अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रोजाना चलने-फिरने और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें।
• लंबे सफर में सावधानी बरतें: कार, बस या विमान में लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान सुरक्षित अवसर मिलने पर पैर हिलाएं और चलें।
• लक्षणों को नजरअंदाज न करें: एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या रंग बदलने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
DVT के इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
DVT के संभावित लक्षणों में एक पैर में सूजन, पिंडली या जांघ में दर्द, प्रभावित हिस्से में गर्माहट और त्वचा का लाल या गहरे रंग का दिखना शामिल हो सकता है। कई बार इस समस्या के स्पष्ट लक्षण भी नहीं होते।
यदि अचानक सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।












