Dhanteras 2026: धनतेरस की तारीख पर कंफ्यूजन करें दूर, पूजा से पहले खरीदें ये 5 शुभ चीजें, जानें धनतेरस का मुहूर्त, खरीदारी के नियम और किन चीजों से बचें
धनतेरस 2026 कब है? जानें 6 नवंबर की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा।

Dhanteras 2026 Date and Shubh Muhurat: दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दीपावली के पहले इस पूजा का काफी महत्व है। खासकर गृहणियों के लिए धनतेरस काफी महत्वपूर्ण रहता है।
मान्यता है कि धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और कुछ शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन लोग अपने घर और व्यापार में बरकत की कामना के साथ नई वस्तुएं खरीदते हैं।
अगर आप भी धनतेरस 2026 पर खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो पहले जान लें कि यह पर्व कब मनाया जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, कौन-सी पांच चीजें खरीदना शुभ माना जाता है और किन वस्तुओं को लेकर धार्मिक मान्यताओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
धनतेरस 2026 कब है? जानें सही तारीख
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण 6 नवंबर को धनतेरस मनाना उचित माना गया है।
धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर शाम के समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ समय इस प्रकार है:
• धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
• त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: सुबह 10:30 बजे
• त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे
• प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक
• पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक
ये समय दिल्ली के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। आपके शहर में सूर्यास्त और लग्न के अंतर के कारण पूजा के समय में कुछ बदलाव हो सकता है।
धनतेरस पर खरीदें ये 5 शुभ चीजें
1. सोना और चांदी
धनतेरस पर सोने और चांदी के आभूषण, सिक्के या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन धातुओं का संबंध समृद्धि और स्थिरता से जोड़ा जाता है।
हालांकि, सोना-चांदी खरीदना जरूरी नहीं है। अपनी आर्थिक स्थिति और बजट के अनुसार ही खरीदारी करें।
2. पीतल और तांबे के बर्तन
धनतेरस पर पीतल, तांबे या अन्य धातुओं के बर्तन खरीदने की परंपरा है। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने को शुभता और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जोड़ा जाता है।
आप अपनी जरूरत के अनुसार पूजा का लोटा, थाली, कटोरी या अन्य घरेलू बर्तन खरीद सकते हैं।
3. झाड़ू
धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता में झाड़ू को स्वच्छता और माता लक्ष्मी के आगमन से जोड़ा जाता है।
इस दिन घर की साफ-सफाई करना और नई झाड़ू खरीदना कई परिवारों की परंपरा है। इसका प्रतीकात्मक संदेश घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना है।
4. साबुत धनिया
धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। कुछ परिवार पूजा के बाद इसे अपने पूजा स्थान या तिजोरी के पास रखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे मिट्टी में बोते हैं।
इसे सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना से जोड़कर देखा जाता है।
5. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति
दीपावली की पूजा के लिए धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार मिट्टी या धातु की मूर्ति ले सकते हैं।
मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट, स्वच्छता और पूजा के लिए उपयुक्तता का ध्यान रखें। दीपावली पर विधि-विधान से पूजा करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
धनतेरस पर नमक, कौड़ी और गोमती चक्र खरीदने की मान्यता
सोना-चांदी और बर्तनों के अलावा कई परिवार धनतेरस पर नमक, सफेद कौड़ी और गोमती चक्र भी खरीदते हैं। इन वस्तुओं को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं।
• नमक: कुछ परिवार इसे शुभता और घर की समृद्धि से जोड़ते हैं।
• कौड़ी: पूजा में माता लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में रखी जाती है।
• गोमती चक्र: कुछ लोग इसे पूजा स्थान या तिजोरी में रखते हैं।
इन परंपराओं का पालन करना व्यक्तिगत आस्था का विषय है। इन वस्तुओं को खरीदने से धन बढ़ने की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती।
धनतेरस पर किन चीजों को खरीदने से बचें?
धनतेरस पर कुछ वस्तुओं को लेकर पारंपरिक मान्यताएं और सावधानियां प्रचलित हैं। हालांकि, इनके अशुभ होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
• टूटी या क्षतिग्रस्त वस्तुएं: खरीदारी करते समय खराब या टूटी चीजों से बचें।
• टूटे-फूटे बर्तन: उपयोग के लिए अच्छी स्थिति वाले बर्तन खरीदें।
• बिना जरूरत की महंगी खरीदारी: केवल धार्मिक मान्यता के कारण कर्ज लेकर खरीदारी न करें।
• नुकीली वस्तुओं को लेकर मान्यता: कुछ परिवार धनतेरस पर चाकू या अन्य धारदार वस्तुएं खरीदने से बचते हैं। यह क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
ध्यान रखें कि किसी वस्तु को खरीदने मात्र से दुर्भाग्य आने का दावा प्रमाणित नहीं है। खरीदारी अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से करना बेहतर है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। माता लक्ष्मी की आराधना धन-समृद्धि और भगवान कुबेर की पूजा धन-संपत्ति की कामना से जुड़ी है।
धनतेरस पर यम दीपदान का क्या महत्व है?
धनतेरस के दिन यमराज के नाम से दीप जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दीपदान करने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।
परिवार की परंपरा के अनुसार शाम को दीप जलाकर सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
धनतेरस 2026 पर पूजा कैसे करें?
धनतेरस के दिन पूजा के लिए आप यह सरल विधि अपना सकते हैं:
1. घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
2. पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
3. दीपक जलाएं और पुष्प, अक्षत, फल तथा अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें।
4. भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
5. शाम को परिवार की परंपरा के अनुसार यम दीपदान करें।
पूजा विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है। अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करना उचित है।












