OBC क्रीमी लेयर मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका! सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की OBC आरक्षण के नियम, अब फिर से बनेगा सर्टिफिकेट
OBC Creamy Layer: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अर्जी खारिज की, जानिए क्या होगा असर

OBC Reservation : OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में केंद्र सरकार के नियम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण में क्रीमी लेयर निर्धारित करने के नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, मामले की सही कानूनी स्थिति समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने किस आदेश को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज की है और उसका क्रीमी लेयर के मौजूदा नियमों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 6 नवंबर 2026 को केंद्र सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें 11 मार्च 2026 के फैसले को केवल भविष्य में लागू करने की मांग की गई थी।
केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि फैसले को पिछली भर्तियों पर लागू करने से नियुक्तियों, सेवा आवंटन, वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े मामलों में परेशानी पैदा हो सकती है।
सरकार ने फैसले को लागू करने के लिए मांगा था दो साल का समय
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसले को भविष्य तक सीमित रखने का कोई उचित आधार नहीं है। अदालत ने सरकार को आदेश लागू करने के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।
अदालत ने 2004 के स्पष्टीकरण के आधार पर केवल वेतन को निर्णायक मानने की व्यवस्था को उचित नहीं माना था।
पूर्व की नियुक्तियां भी होगी प्रभावित
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया है।
पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाएं और नियुक्तियां दोबारा नहीं खोली जाएंगी।
मौजूदा कर्मचारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी।
जिन अभ्यर्थियों के समान मामले अदालत या अन्य सक्षम प्राधिकरण के सामने लंबित हैं, उन पर संबंधित प्राधिकरण अपने गुण-दोष के आधार पर फैसला करेंगे।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयनित OBC अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन सुप्रीम कोर्ट के नए मानकों के अनुसार होगा
OBC अभ्यर्थियों के लिए अहम है फैसला
इस फैसले से खासकर उन OBC अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके माता-पिता PSU, बैंक या निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं और जिनकी उम्मीदवारी केवल माता-पिता के वेतन को आधार बनाकर क्रीमी लेयर में रखे जाने के कारण प्रभावित हुई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सभी OBC अभ्यर्थियों को स्वतः नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ नहीं दिया है। दूसरे अभ्यर्थियों के लंबित मामलों पर अलग-अलग विचार किया जाएगा।
अब केंद्र सरकार को आठ सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी।











