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झारखंड-वेतन घोटाला पर एक्शन: मुख्यमंत्री ने CID जांच के दिये आदेश, IAS की कमेटी भी करेगी मामले की जांच, 25 महीने में निकाली गयी 63 बार सैलरी

Action on Jharkhand Salary Scam: Chief Minister Orders CID Probe; IAS Committee to Also Investigate the Matter—Salary Withdrawn 63 Times in 25 Months.

रांची। झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की वेतन घोटाला सहित अवैध निकासी की CID जांच होगी। झारखंड में सरकारी कोषागार (ट्रेजरी) से वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को लेकर मुख्यमंत्री Hemant Soren ने पूरे मामले की CID जांच के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद वेतन घोटाले में शामिल गिरोह, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही CID मुख्यालय ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की अधिसूचना जारी की जाएगी। यह SIT किसी वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी और राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर दस्तावेजों और वेतन सहित अन्य वित्तीय लेनदेन की गहन जांच करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि ट्रेजरी से अवैध निकासी किन-किन स्तरों की मिलीभगत से संभव हुई और किन प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।

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प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर वेतन निकाला जा रहा था। इस तरह की अवैध निकासी के मामले Bokaro और Hazaribagh जिलों में सामने आ चुके हैं। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला राज्य के अन्य जिलों में भी फैला हो सकता है। इसी को देखते हुए अब झारखंड के सभी 24 जिलों के ट्रेजरी रिकॉर्ड की व्यापक जांच की तैयारी की जा रही है।

राज्य सरकार इस मामले को केवल आपराधिक दृष्टिकोण से ही नहीं देख रही है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही और विफलता की भी अलग से जांच कराई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव स्तर से जल्द ही एक आदेश जारी किया जा सकता है, जिसमें किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी को प्रशासनिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई और कैसे इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा लंबे समय तक चलता रहा।
इस पूरे मामले को उजागर करने और इसकी गंभीरता को समझते हुए राज्य के वित्त मंत्री Radhakrishna Kishore ने मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा की थी। उनके सुझाव के बाद ही इस मामले में तेजी आई और अब CID जांच के आदेश दिए गए हैं।

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यह घोटाला न केवल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, बल्कि वित्तीय निगरानी व्यवस्था में भी गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। अब सभी की नजरें SIT की जांच पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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