ममता बनर्जी हारी: शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी को 15000 से ज्यादा वोट से हराया, ममता के गढ़ भवानीपुर में दी करारी शिकस्त, बोले, मुझे सिर्फ हिंदूओं ने वोट दिया…
Mamata Banerjee loses: Shubhendu Sarkar defeats Mamata Banerjee by over 15,000 votes, defeats Mamata's stronghold Bhawanipur, says only Hindus voted for me...

Mamta Banarjee Vs Shubhendu Sarkar : बंगाल चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री तो छोड़िये विधायक के लाय भी नहीं छोड़ा है। भवानीपुर विधानसभा से वो 16000 से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गयी है। उन्हें शुभेंदु सरकार ने उन्हें ये करारी मात दी है। इससे पहले शुभेंदु सरकार नंदीग्राम से भी चुनाव जीत चुके हैं। कभी ममता बनर्जी के राइट हैंड कहे जाने वाले शुभेंदु सरकार 2020 में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये थे।
आपको बता दें कि तृणमूल से अलग होने से बाद 2021 में शुभेंदु सरकार ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी को करीब 2000 वोटों से नंदीग्राम में हराया था। हालांकि 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव जीती थी और फिर मुख्यमंत्री बनी थी। भवानीपुर को ममता बनर्जी का गढ़ कहा जाता है। वो भवानीपुर मे ही रहती भी है।
ममता बनर्जी इस बार सिर्फ भवानीपुर से चुनाव लड़ी थी, जहां उन्हें एक बार फिर शुभेंदु सरकार ने चुनौती दी और फिर यहां करीब 16000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। जीत के बाद शुभेंदु सरकार ने कहा कि भवानीपुर में उन्हें हिंदू मतदाताओं का भरपूर समर्थन दिया। हिंदू वोटरों की वजह से ही उन्होंने ये जीत दर्ज की है। उन्होंने हिंदू मतदाताओं का जीत के लिए आभार भी जताया है।
आपको बता दें कि 1995 में उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से है। वह 1998 से 2020 तक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कद्दावर नेता रहे और ममता बनर्जी की सरकार में परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 2020 के बाद जबसे वे भाजपा में शामिल हुए तब से उन्होंने पार्टी के मुख्य रणनीतिकार के तौर पर काम किया है।
शुभेंदु का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली में हुआ था। उनकी मां का नाम गायत्री अधिकारी है। शुभेंदु बंगाल के एक बेहद ताकतवर राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता, शिशिर अधिकारी राज्य के एक प्रमुख नेता हैं जो मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रह चुके हैं। पूर्व मेदिनीपुर क्षेत्र में उनके परिवार का इतना गहरा प्रभाव है कि उन्हें अक्सर इलाके का सियासी सम्राट कहा जाता है। शुभेंदु के भाई दिब्येंदु और सौमेंदु भी सांसद और नेता के रूप में सक्रिय हैं। शिक्षा के क्षेत्र में, उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से कला में स्नातकोत्तर की डिग्री ली है।
शुभेंदु अधिकारी की राजनीति में एंट्री कांग्रेस के जरिए हुई थी 1995 में उन्होंने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए कांग्रेस जॉइन की। इसी साल वह पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पूर्वी मेदिनीपुर की कांथी नगर पालिका में पार्षद चुने गए थे। हालांकि, शुभेंदु और कांग्रेस का साथ ज्यादा लंबा नहीं चला। 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, तो शुभेंदु और उनका पूरा परिवार भी टीएमसी का हिस्सा बन गया।
इसी के चलते अधिकारी परिवार के कोई बार टीएमसी के सह-संस्थापकों के तौर पर भी जाना जाता है। राज्य स्तर की मुख्यधारा की राजनीति में उनका बड़ा कदम साल 2006 में आया। वह कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में जीतकर पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे। इसी वर्ष उन्हें कांथी नगर पालिका का अध्यक्ष भी चुना गया।







