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झारखंड: ये तो अति है…..मरीज अस्पताल में तड़पता रहा, डॉक्टर मिली ही नहीं, जिस शख्स ने समय पर अस्पताल पहुंचाकर सैंकड़ों जान बचायी, उसे ही समय पर नहीं मिला इलाज, हुई मौत

Jharkhand: This is too much... The patient kept suffering in the hospital, but no doctor was available. The person who saved hundreds of lives by taking him to the hospital on time, did not get timely treatment and died.

परिजन डाक्टर को ढूंढते ही रह गये और मरीज की तड़प-तड़पकर मौत हो गयी। समय पर अस्पताल पहुंचाकर सैंकड़ों लोगों की जान बचाने वाले एंबुलेंस ड्राइवर को खुद ही समय पर इलाज नहीं मिल सका, जिसके बाद उसकी मौत हो गयी। घटना झारखंड के गुमला जिले के कामडारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है। जहां ड्यूटी से गायब डॉक्टर की वजह से एंबुलेंस ड्राइवर संदीप प्रधान का इलाज नहीं हो सका।
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गुमला। मरीज अस्पताल में तड़प रहा था, लेकिन अस्पताल में डाक्टर थी ही नहीं…इलाज के दवाब में आखिरकार मरीज की मौत हो गयी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की ये कहानी झारखंड के गुमला जिले की है, जहां कामडारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण एक एंबुलेंस चालक की इलाज के अभाव में मौत हो गई।

इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। मृतक की पहचान 45 वर्षीय संदीप प्रधान के रूप में हुई है, जो पिछले करीब 15 वर्षों से एंबुलेंस चालक के रूप में कार्यरत थे। संदीप लंबे समय से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर लोगों की जान बचाने का काम कर रहे थे, लेकिन विडंबना यह रही कि जब उन्हें खुद इलाज की जरूरत पड़ी, तब अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

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बताया जा रहा है कि अचानक संदीप प्रधान के पेट में तेज दर्द शुरू हुआ। उनकी हालत लगातार बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिवार और ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल कामडारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को पता चला कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक मौजूद नहीं हैं। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उस समय महिला चिकित्सक सविता कुमारी की ड्यूटी थी, लेकिन वे अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।

परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध रहतीं तो संदीप की जान बचाई जा सकती थी। इलाज नहीं मिलने के कारण संदीप ने अस्पताल परिसर में ही तड़पते हुए दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।

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ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर अनुपस्थित रहते हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टर सविता कुमारी को अस्पताल बुलाने की कोशिश की। जब वे अस्पताल पहुंचीं तो शुरुआत में उन्होंने अपनी ड्यूटी होने से इनकार कर दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुनील खलको ने तत्काल ड्यूटी रोस्टर की जांच कराई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दूसरे रविवार से सोमवार तक दिन और रात की ड्यूटी डॉक्टर सविता कुमारी की ही थी। ड्यूटी रोस्टर सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित डॉक्टर सप्ताह में केवल दो दिन कुछ घंटों के लिए अस्पताल आती हैं और नाइट ड्यूटी नहीं करतीं। उनका कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही का खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। घटना के बाद नाराज ग्रामीणों ने रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग जाम करने की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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