झारखंड: दो साल से जेल में बंद पूर्व मंत्री व उनके आप्त सचिव को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की मंजूर, छापेमारी में 32 करोड़ कैश….
Jharkhand: Supreme Court grants bail to former minister and his personal secretary, who were in jail for two years, 32 crore rupees in cash recovered during raid.

झारखंड के चर्चित टेंडर आवंटन और कथित कमीशन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके पूर्व आप्त सचिव संजीव लाल को जमानत दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर बताया था, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राहत प्रदान की।
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रांची। दो साल से जेल में बंद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम व उनके आप्त सचिव को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित टेंडर आवंटन और कथित कमीशन घोटाला मामले में दोनों को जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री Alamgir Alam और उनके पूर्व आप्त सचिव Sanjeev Lal को जमानत दे दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस M.M. Sundresh और जस्टिस N. Kotiswar Singh की पीठ ने दोनों आरोपितों को राहत प्रदान की।
सुनवाई के दौरान ईडी ने जमानत का कड़ा विरोध किया। ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसमें कथित कमीशनखोरी तथा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं। इस दौरान एजेंसी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देश के बावजूद अब तक चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं। ईडी ने आशंका जताई कि यदि आरोपितों को जमानत दी जाती है तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आलमगीर आलम की उम्र 77 वर्ष है और वे दो वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। उनके वकीलों ने यह भी कहा कि आलमगीर आलम के पास से कोई नकद राशि या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपितों को जमानत देने का आदेश पारित किया।
आपको बता दें कि इससे पहले 2 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी ईडी ने दोनों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया था। तब एजेंसी ने अदालत को बताया था कि ट्रायल कोर्ट में चार अहम गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी है और ऐसे में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि एक महीने के भीतर चारों महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।
इन गवाहों में मुन्ना सिंह, संतोष कुमार उर्फ रिंकू, संपत्ति विक्रेता स्वर्णजीत सिंह गिल और बिंदेश्वर राम शामिल बताए गए थे। अदालत ने उस समय अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की थी।गौरतलब है कि यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब ईडी ने 6 मई 2024 को संजीव लाल, जहांगीर आलम और अन्य से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान जहांगीर आलम के ठिकाने से 32 करोड़ 20 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।
वहीं संजीव लाल के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद और एक डायरी भी मिली थी।ईडी के अनुसार डायरी में कथित कमीशन राशि के लेनदेन और बंटवारे का विवरण दर्ज था। इसमें संबंधित लोगों के नामों के लिए कथित रूप से कोड वर्ड का उपयोग किया गया था। इन दस्तावेजों और बरामद नकदी के आधार पर ईडी ने 7 मई 2024 को संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को पूछताछ के लिए समन भेजा गया। दो दिनों तक पूछताछ के बाद ईडी ने 15 मई 2024 की देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।जांच एजेंसी अब तक संजीव लाल की 4.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है, जबकि जहांगीर आलम के ठिकाने से बरामद 32.20 करोड़ रुपये नकद भी जब्त किए जा चुके हैं।







