रांची: सावधान ! अब साइबर ठग बन गये हैं जनगणना कर्मचारी, डिजिटल फार्म के नाम पर मांग रहे OTP

रांची/1.6.26। साइबर ठगी ऐसा तरीका बन गया है जो दिन और समय के हिसाब से बदलता जाता है। व्हाट्सएप-फेसबुक व बैंकिंग फ्रॉड के पुराने हो चुके तरीके के बाद अब ठगों ने झारखंड में नया तरीका ईजाद कर लिया है। साइबर ठगों ने डिजिटल जनगणना के जरिए लोगों को ठगना शुरू कर दिया है। बोकारो जिले में कई ऐसी शिकायती आई है जिसके बाद लोगों में ठगी के शिकार होने का खतरा बढ़ गया है।
शातिर अपराधी खुद को सर्वेयर बताकर सीधे लोगों के मोबाइल पर कॉल कर रहे हैं और डिजिटल फॉर्म कंप्लीट करने के नाम पर ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारी हासिल कर रहे हैं। बोकारो जिले के चास सहित कई जगह पर साइबर ठगी की ऐसी ही शिकायत सामने आई है। लगातार बढ़ रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन भी आप अलर्ट मोड पर आ गया है।
दर्ज हो रही लगातार शिकायतों के मुताबिक साइबर ठग बेहद शातिराना तरीके से लोगों को फोन कर प्रोफेशनल अंदाज में यह कहते हैं कि, आपका मकान का सूचीकरण कर लिया गया है। प्रथम चरण के तहत आपके घर की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप में भरी जा चुकी है। बातचीत के दौरान झांसा दिया जाता है कि अब इस डिजिटल जनगणना फॉर्म को फाइनल कंप्लीट करने के लिए आपके मोबाइल पर एक ओटीपी जाएगा, उसे तुरंत बताइए, जैसे ही कोई झांसे में आकर अपना ओटीपी नंबर साझा करता है पल भर में वह मोबाइल हैक कर लिया जाता है।
जिसके बाद उनके बैंक खाता सहित अन्य जानकारी तुरंत ही साइबर ठगों के पास पहुंच जाती है और फिर मिनट में ही पूरा बैंक खाता साफ हो जा रहा है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन भी एक्टिव मोड पर आ गया है। चास के वीडियो ने आम लोगों को सायबर ठगों से सतर्क रहने की अपील की है। वीडियो ने साफ कहा है कि क्षेत्र में तैनात जनगणना कर्मी केवल जनगणना का कार्य कर रहे हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार की कोई वित्तीय जानकारी, बैंक डिटेल, आधार नंबर या फिर गोपनीय डाटा नहीं मांगा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई कॉल उन तक आता है तो तत्काल इसकी सूचना प्रखंड कार्यालय को दें। जिला प्रशासन ने अनजान कॉल नंबरों पर ज्यादा देर तक बात नहीं करने की भी नसीहत दी है। जिला प्रशासन की तरफ से यह भी नसीहत दी गई है कि अगर कोई अनजान नंबर पर कॉल आता है और बार-बार ओटीपी देने के लिए कहा जाता है, तो बिना ज्यादा बातचीत किए तुरंत कॉल को डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए।
संदेह हॉस्पिटल गतिविधि या कॉल आने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में संपर्क करने की भी बात जिला प्रशासन की तरफ से कही गई है, ताकि शिकायतों के आधार पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।









