शादी की शहनाई से पहले उठी अर्थी: एक्सीडेंट के बाद अस्पताल में थे भर्ती, अग्निकांड में जिंदा जलकर हो गयी मौत, वित्त विभाग में थे पदस्थ, लेकिन ठीक होने से पहले….
A funeral procession instead of wedding music: He was hospitalized following an accident but burned to death in a fire; he was employed in the Finance Department, yet before he could recover...

मुजफ्फरपुर/औराई। जिस घर में शादी की शहनाई गूंजनी थी, वहां अब मातम पसरा है। पूरा परिवार जिस बेटे की बारात निकालने की तैयारी कर रहा था, उसकी अर्थी उठने से पूरा गांव गम में डूबा है । मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड ने औराई प्रखंड के रतनपुर गांव निवासी शशांक की जिंदगी छीन ली और उसके साथ ही परिवार के कई सपने भी राख हो गए।
शशांक बिहार सरकार के वित्त विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। परिवार के अनुसार उनकी शादी तय हो चुकी थी और घर में विवाह की तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदारों को निमंत्रण देने से लेकर शादी की अन्य तैयारियों का दौर शुरू हो चुका था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शशांक अस्पताल में चोट से ठीक होने के लिए भर्ती हुई थी, लेकिन क्या पता था, यहां से कभी वो स्वस्थ्य होकर ही लौट नहीं पायेंगे।
दरअसल, 29 मई को शशांक पटना से ट्रेन के जरिए मुजफ्फरपुर पहुंचे थे और अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान बोचहां थाना क्षेत्र के बहललपुर पुल के पास एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।
परिजनों ने उन्हें मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद शशांक जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगे और शादी की तैयारियां फिर से रफ्तार पकड़ेंगी। लेकिन अस्पताल में लगी आग ने सारी उम्मीदों को खत्म कर दिया।
शशांक के चाचा बैजू चौधरी ने बताया कि उनके इलाज में अब तक करीब तीन लाख रुपये खर्च हो चुके थे। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से भी उपचार कराया जा रहा था। परिवार ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन अग्निकांड ने सब कुछ छीन लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। वार्डों में धुआं भर गया और मरीजों को बाहर निकालने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बचाव कार्य में जुट गए। शशांक को भी अस्पताल की पांचवीं मंजिल से नीचे लाया गया, लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।
गुरुवार को जब शशांक का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव रतनपुर पहुंचा तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जिस आंगन में शादी की खुशियों की तैयारी चल रही थी, वहां चीख-पुकार और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव के लोग इस दर्दनाक घटना को सुनकर स्तब्ध हैं।








