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रांची: तीन विधायकों ने की गलत वोटिंग, “किसी ने दिया नंबर, तो किसी ने बना दिया बॉक्स”गलती या रणनीति? ट्रेनिंग के बावजूद तीन विधायकों की ‘चूक’ पर गहराता शक

झारखंड राज्यसभा चुनाव में 3 विधायकों की गलत वोटिंग से मचा बवाल। मॉक पोल के बावजूद हुई चूक पर उठे सवाल—गलती या सियासी रणनीति? Jharkhand Rajya Sabha Election 2026 Jharkhand RS Election Voting Error Jharkhand MLA Invalid Vote Rajya Sabha Election Jharkhand Result Baijnath Ram Parimal Nathwani जीत Pranav Jha हार Jharkhand Voting Controversy Mock Poll Voting Mistake Jharkhand

रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव का परिणाम सामने आते ही सियासी हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी की जीत तो तय हो गई, लेकिन इस चुनाव की सबसे दिलचस्प और विवादित कहानी उन तीन वोटों की है, जिन्हें अवैध घोषित कर दिया गया। सवाल सीधा है — क्या ये महज ‘गलतियां’ थीं, या फिर इसके पीछे कोई सियासी रणनीति छिपी हुई थी? सवाल ये भी है कि जब सत्ता पक्ष एकता की बात कर रहा था, तो फिर जरूरी आंकड़े कांग्रेस को क्यों नहीं मिले। तीन विधायकों की गलत वोटिंग क्या नासमझी थी या फिर जानबूझकर? माले जब दावा कर रहा है कि उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया, तो फिर कांग्रेस की पीठ में खंजर किसने भोंका?

मॉक पोल के बाद भी गलती कैसे?

चुनाव से पहले सभी विधायकों को मॉक पोलिंग के जरिए वोटिंग प्रक्रिया की बाकायदा ट्रेनिंग दी गई थी। इसके बावजूद जो गलतियां सामने आईं, वे सामान्य नहीं लगतीं।किसी विधायक ने पहली प्राथमिकता के बॉक्स के ऊपर नया बॉक्स बना दिया, तो किसी ने सभी प्रत्याशियों के सामने ‘एक’ लिख दिया। एक विधायक ने तो कांग्रेस प्रत्याशी के सामने ‘जीरो’ लिख दिया। वहीं, एक ने पूरी रैंकिंग कर दी,निर्दलीय प्रत्याशी नथवाणी को एक लिखा, बैजनाथ को दो नंबर दिया, प्रणव के सामने तीन लिखा….. — जो इस चुनाव प्रणाली में पूरी तरह अमान्य है।यहां सवाल उठता है कि जब प्रक्रिया स्पष्ट थी और प्रशिक्षण भी दिया गया था, तो इतनी बुनियादी गलतियां कैसे हो गईं?

नासमझी या जानबूझकर खेल?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की ‘गलतियां’ कई बार संयोग नहीं होतीं। खासकर तब, जब चुनाव का परिणाम बेहद करीबी हो और हर वोट की अहमियत हो।तीन वोटों का रद्द होना सीधे-सीधे समीकरण बदल सकता है। क्या ये विधायकों की व्यक्तिगत चूक थी, या फिर किसी दबाव, भ्रम या अंदरूनी रणनीति का हिस्सा?यह भी संभव है कि कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वोट देने की कोशिश की हो, लेकिन तकनीकी गलती के कारण उनका वोट ही रद्द हो गया।

फर्जी पत्र ने बढ़ाया सस्पेंस

राज्यसभा चुनाव के बीच वायरल हुआ एक फर्जी पत्र भी इस पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना देता है। पत्र में बैजनाथ राम और प्रणव झा को पहले ही ‘निर्वाचित सांसद’ बताते हुए उनके लिए झारखंड भवन में कमरा बुक करने की बात कही गई थी।हालांकि बाद में यह पत्र पूरी तरह फर्जी साबित हुआ, लेकिन इसने मतदान के दौरान भ्रम की स्थिति जरूर पैदा की। सवाल यह है कि इस तरह का पत्र किसने और किस मकसद से वायरल किया?

हेमंत सोरेन की ‘चाय पे चर्चा’

इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भाजपा विधायकों के साथ चाय पर हंसी-मजाक करना भी चर्चा का विषय बन गया। राजनीति के इस गंभीर माहौल में यह हल्का पल कई संकेत भी छोड़ गया — क्या यह सामान्य शिष्टाचार था या राजनीतिक संदेश?

लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय

पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है — क्या हमारे जनप्रतिनिधि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त सजग हैं?या फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भीतर ही ऐसे ‘तकनीकी रास्ते’ मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है?

जांच और जवाब जरूरी

तीन विधायकों की गलत वोटिंग को केवल ‘मानवीय भूल’ कहकर नजरअंदाज करना जल्दबाजी होगी। जरूरत है कि गठबंधन को इस पूरे मामले की गहराई से जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि यह महज संयोग था या फिर सुनियोजित रणनीति। झारखंड में सत्ता का गठबंधन सिर्फ दिखावे भर है या फिर वाकई में ये मजबूत भी है?क्योंकि लोकतंत्र में हर वोट की कीमत होती है — और जब वोट ही संदिग्ध हो जाए, तो सवाल केवल परिणाम पर नहीं, पूरी प्रक्रिया पर उठते हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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