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हाईकोर्ट से गढ़वा कांड के मुख्य आरोपी को बड़ा झटका, अग्रिम जमानत खारिज; गिरफ्तारी का रास्ता साफ

गढ़वा के चर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी राहुल चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर जानिए पूरा मामला।

रांची/गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले हाईकोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। हाईकोर्ट से मुख्य आरोपी राहुल चौधरी को कोई भी राहत नहीं मिली है। गढ़वा के डंडा थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय छात्रा के कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका (एबीए संख्या 4156/2026) को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

दरअसल इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान पीड़िता (सूचक) की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार सारस्वत ने अदालत को बताया कि आरोपी राहुल चौधरी के खिलाफ निचली अदालत पहले ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 84 के तहत इश्तहार और कुर्की की कार्रवाई का आदेश जारी कर चुकी है।

जब अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि आरोपी के खिलाफ कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

याचिका में दर्ज तथ्यों के अनुसार, पीड़िता पलामू जिले के पनेरीबांध में रहकर पढ़ाई करती थी। उसी इलाके में चैनपुर थाना क्षेत्र के बरांव गांव निवासी राहुल चौधरी भी रहता था। आरोप है कि राहुल ने छात्रा को पिस्तौल की नोक पर धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसने शादी का झांसा देकर पीड़िता को चुप रहने के लिए मजबूर किया।

घर से अगवा करने का आरोप

याचिका के अनुसार, 4 अप्रैल 2026 को जब पीड़िता के माता-पिता घर पर नहीं थे, तब राहुल चौधरी अपने बहनोई आलोक चौधरी के साथ घर पहुंचा। आरोप है कि दोनों ने हथियार के बल पर छात्रा का अपहरण कर उसे पलामू जिले के रेहला थाना क्षेत्र स्थित सिगसिगी गांव के लोहरदगा टोला ले गए। वहां राहुल की बहन पूजा देवी और अन्य परिजनों की मौजूदगी में कथित तौर पर मांग में सिंदूर भरकर शादी का ढोंग रचाया गया।

तहले नदी पुल के पास सामूहिक दुष्कर्म का आरोप

याचिका में कहा गया है कि वापस लौटने के दौरान तहले नदी पुल के नीचे राहुल चौधरी और उसके बहनोई आलोक चौधरी ने कथित तौर पर पीड़िता के साथ बारी-बारी से सामूहिक दुष्कर्म किया।

पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल

याचिका में डंडा थाना पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद उसे तीन दिनों तक थाने में बैठाकर रखा गया। उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया गया और उस पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया। यह भी आरोप है कि पुलिस ने मामले को चार वर्ष पुराने प्रेम संबंध का रूप देने की कोशिश की और मुख्य आरोपी राहुल चौधरी को थाने से छोड़ दिया।

डीएलएसए के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी

याचिका के अनुसार, बाद में गढ़वा आश्रय गृह में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पैरालीगल वॉलंटियर से मुलाकात के बाद पीड़िता ने 10 अप्रैल को डीएलएसए सचिव को आवेदन दिया।इसके बाद डीएलएसए के हस्तक्षेप पर 14 अप्रैल 2026 को डंडा थाना में कांड संख्या 09/2026 दर्ज किया गया और अगले दिन पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।

अब भी मिल रही धमकियां

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्राथमिकी दर्ज होने के कई महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। अदालत के आदेश के बाद 22 जुलाई को आरोपी के घर पर इश्तहार चिपकाया गया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी और उसके सहयोगी अब भी केस वापस लेने के लिए लगातार धमकी दे रहे हैं।हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब पुलिस के पास आरोपी राहुल चौधरी की गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की जांच जारी है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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