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झारखंड में संविदाकर्मी बिना परीक्षा दिये नहीं हो सकेंगे नियमित, सरकार ने प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा, जानिये अनुबंध+परीक्षा का पूरा फार्मूला

झारखंड सरकार ने संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए नया फार्मूला तैयार किया है, जिसमें परीक्षा के साथ अनुभव के आधार पर 0.15% से 15% तक वेटेज मिलेगा।

रांची: नियमितिकरण की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने स्थिति साफ कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना परीक्षा दिये उन्हें नियमित नहीं किया जायेगा। हालांकि राहत की बात ये है कि सरकार नियमितिकरण को लेकर होने वाली परीक्षा में उन्हें अनुभव के आधार पर बोनस अंकर देगी। राज्य के हजारों संविदा कर्मियों के लिए ये राहत भरी खबर भी हो सकती है या चिंता बढ़ाने वाली भी।

सूत्रों के मुताबिक कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने संविदा, दैनिक वेतनभोगी, आउटसोर्स और एकमुश्त पारिश्रमिक पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए एक नया फार्मूला तैयार किया है। इस प्रस्ताव को अब अंतिम मंजूरी के लिए वित्त और विधि विभाग को भेजा गया है।

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सरकार द्वारा तैयार इस नए फार्मूले के तहत कर्मचारियों को नियमित होने के लिए प्रतियोगी परीक्षा देनी होगी। हालांकि इसमें खास बात यह है कि केवल परीक्षा के अंक ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के कार्य अनुभव को भी महत्व दिया जाएगा। अनुभव के आधार पर उन्हें अतिरिक्त वेटेज (अंक) दिया जाएगा, जिससे उनके चयन की संभावना बढ़ जाएगी।

जानिये क्या है नया फार्मूला?

प्रस्ताव के अनुसार, जो कर्मचारी लंबे समय से सेवा दे रहे हैं, उन्हें परीक्षा में बोनस अंक दिए जाएंगे। यह वेटेज 0.15 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक होगा। यानी जितना ज्यादा अनुभव, उतना ज्यादा फायदा।

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किसे मिलेगा वेटेज?

सरकार ने साफ किया है कि केवल उन्हीं कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा, जो कम से कम 3 साल (36 महीने) से सेवा में कार्यरत हैं।

इस तरह मिलेगा वेटेज

  • 36 महीने के अनुभव पर: 0.15% वेटेज
  • 37 से 40 महीने: 0.60% वेटेज
  • 60 महीने से अधिक: 3.60% वेटेज
  • 120 से 136 महीने: 15% तक वेटेज

किन कर्मचारियों को होगा फायदा?

इस फैसले से सचिवालय, क्षेत्रीय कार्यालय, बोर्ड-निगम और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर वे कर्मचारी, जो वर्षों से संविदा या आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे हैं, उनके लिए यह मौका स्थायी नौकरी पाने का रास्ता खोल सकता है।

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क्यों है यह फैसला अहम?

अब तक संविदा कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को न्याय मिल सकेगा। साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की शर्त से योग्य उम्मीदवारों का चयन भी सुनिश्चित होगा।अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को स्थायी नौकरी मिल सकती है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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