गजब हैं मास्टर साहब! चार बच्चों के बाप ने, खुद को दो बच्चों का पापा बता ले ली शिक्षक की नौकरी, 17 साल बाद शिक्षा विभाग की टूटी नींद
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में दो-बच्चे के नियम के बावजूद नियुक्ति पाने वाले शिक्षक को 17 साल बाद निलंबित कर दिया गया। जांच में नियुक्ति नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ।

Teacher News। चार बच्चे के चक्कर में शिक्षक की नौकरी चली गयी। नियुक्ति के समय में दो बच्चों का नियम था, लेकिन शिक्षक के चार बच्चे थे। बावजूद शिक्षक ने गलत तरीके से नौकरी हासिल कर ली थी। अब 17 साल नौकरी के बाद विभाग की नींद टूटी है। पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर लोग हैरान भी हैं और सवाल भी उठा रहे हैं। जिस शिक्षक को नियुक्ति के समय लागू दो-बच्चे के नियम के कारण सरकारी नौकरी नहीं मिलनी चाहिए थी, वह करीब 17 साल तक नौकरी करता रहा।
इस दौरान उसके बच्चे बड़े हो गए, उनकी शादियां भी हो गईं और परिवार में नाती-पोते तक आ गए। अब विभागीय जांच में मामला सामने आने के बाद शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।मामला वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बुड़ाटांड़ में पदस्थ सहायक शिक्षक हंसराज सिंह से जुड़ा है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शिक्षक के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच कराई गई थी। जांच में उपलब्ध अभिलेखों, सेवा पुस्तिका, प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन और संबंधित कर्मचारी के बयान का परीक्षण किया गया।
नियुक्ति के समय ही अयोग्य थे शिक्षक
सवाल सिर्फ शिक्षक की नियुक्ति पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी उठ रहा है जिसने लगभग डेढ़ दशक तक इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया। नियुक्ति वर्ष 2009 में हुई, लेकिन पात्रता की जांच का सच 2026 में सामने आया। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विभाग को यह जानकारी 17 साल तक क्यों नहीं मिली? इधर, जांच में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि हंसराज सिंह की नियुक्ति 30 मई 2009 को हुई थी। उस समय प्रभावी नियमों के अनुसार दो से अधिक संतान वाले अभ्यर्थी सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं थे।
विभागीय जांच में पाया गया कि नियुक्ति के समय शिक्षक की चार संतानें थीं। इतना ही नहीं, उनकी तीन संतानें 26 जनवरी 2001 के बाद जन्मी थीं। नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में अभ्यर्थी सरकारी नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जाता था।इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति मिल गई और वे लगातार सेवा करते रहे।
17 साल बाद खुली विभाग की आंख
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज और पात्रता की जांच आखिर कैसे हुई थी। यदि शिक्षक नियुक्ति के समय नियमों के अनुरूप पात्र नहीं थे, तो उन्हें नौकरी कैसे मिली और करीब 17 साल तक यह तथ्य विभाग की नजरों से कैसे ओझल रहा?स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिस शिक्षक के बच्चे अब बड़े हो चुके हैं और परिवार में नई पीढ़ी भी आ चुकी है, उसके खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग को डेढ़ दशक से अधिक समय क्यों लग गया।
निलंबन के साथ विभागीय जांच
जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश में कहा है कि मामला नियुक्ति की वैधता और सेवा में प्रवेश की मूल पात्रता से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हंसराज सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शंकरगढ़ निर्धारित किया गया है।
मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
निलंबन अवधि में शिक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। वहीं विभागीय जांच पूरी होने के बाद अंतिम कार्रवाई की जाएगी।यह मामला केवल एक शिक्षक के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि नियुक्तियों की निगरानी और सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह पूछना लाजिमी होगा कि नियुक्ति के समय नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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चार बच्चे होने के बावजूद मिली सरकारी नौकरी, 17 साल बाद शिक्षक निलंबित; विभागीय जांच शुरू
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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में दो-बच्चे के नियम के बावजूद नियुक्ति पाने वाले शिक्षक को 17 साल बाद निलंबित कर दिया गया। जांच में नियुक्ति नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ।
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