क्या आपने भी SIR में लगाया है फर्जी दस्तावेज? SIR में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का खेल, मचा हड़कंप, 7 साल तक की हो सकती है जेल
झारखंड में SIR के दौरान फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार। चुनाव आयोग ने चेताया- फर्जी दस्तावेज जमा करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है।

रांची/पाकुड़। अगर आपने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन कराने के लिए कोई फर्जी दस्तावेज जमा किया है, तो सावधान हो जाइए। झारखंड में ऐसा ही एक मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। पाकुड़ जिले में एक व्यक्ति को कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर SIR प्रक्रिया में भाग लेने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया है। मामले में गिरफ्तारी के साथ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने साफ कहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या संशोधन कराने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ दस्तावेज तैयार करने में शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
पाकुड़ में पकड़ा गया फर्जी दस्तावेज का मामला
वहीं, संथाल परगना क्षेत्र में SIR के दौरान फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की शिकायत मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने दो दिवसीय दौरा किया। इसी दौरान पाकुड़ में एक व्यक्ति के खिलाफ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने का मामला सामने आया।CEO के. रवि कुमार ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
7 साल तक की जेल का प्रावधान
निर्वाचन आयोग के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटाने या संशोधन के लिए जाली प्रमाण पत्र या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है।ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान है।
गलत जानकारी देना भी अपराध
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR फॉर्म भरते समय जानबूझकर गलत जानकारी देना, दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का प्रयास करना या फर्जी पहचान का उपयोग करना भी दंडनीय अपराध है।लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत ऐसे मामलों में एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
जिला उपायुक्तों को जारी हुए निर्देश
फर्जी दस्तावेजों के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और उपायुक्तों को विशेष निर्देश जारी किए हैं।पत्र में कहा गया है कि SIR-2026 के दौरान जमा होने वाले सभी दस्तावेजों का बहुस्तरीय सत्यापन किया जाए। साथ ही नागरिकों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए ताकि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज तैयार न कराए और न ही उसका उपयोग करे।
कई स्तरों पर होगी जांच
निर्वाचन आयोग के मुताबिक SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की पहले AERO स्तर पर जांच होगी। इसके बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी और उपायुक्त स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा।आयोग का दावा है कि इस बहुस्तरीय जांच व्यवस्था के कारण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ना लगभग असंभव होगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी साहिबगंज और लोहरदगा जिलों से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने और उपयोग करने की शिकायतें मिली थीं, जिनमें प्रशासन ने कार्रवाई की थी। अब पाकुड़ का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग और अधिक सतर्क हो गया है।









