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झारखंड में 60 साल के बाद भी मिल रहा नियुक्ति पत्र,देश भर में बना अनोखा राज्य, हेमंत सरकार का बेरोजगारों के साथ बड़ा मजाक

In Jharkhand, appointment letters are being issued even after 60 years of age; the state has become unique across the country—a cruel joke played by the Hemant government on the unemployed.

झारखंड: रिटायरमेंट के बाद मिला सहायक आचार्य का नियुक्ति पत्र, भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
रांची:हेमंत सरकार भले अपनी झूठी उपलब्धि को बड़ी उपलब्धि गिनवा रही हो,मंच से रोजगार देने का ढोल पीट रही हो, लेकिन राज्य की जनता सरकार से ये सवाल कर रही है कि ये उपलब्धि है या मजाक! बड़े बड़े होर्डिंग्स, सभी मीडिया की सुर्खियां और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़े बड़े तस्वीर के साथ राज्य भर नियुक्ति वितरण समारोह का प्रचार करवा रही उपलब्धि की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।किसी को  सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति पत्र मिल रहा तो कोई नियुक्ति पत्र मिलने के अगले दिन सेवानिवृत्ति हो रहा है। इसे बेरोजगारों को रोजगार देने की कवायद नहीं बल्कि झूठी उपलब्धि गिनवाकर बेरोजगारों के साथ बड़ा मजाक है।

राज्य की सरकारी मशीनरी की सुस्ती ने कई अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर दिया। वर्षों तक फाइलों में अटकी भर्ती प्रक्रिया का नतीजा यह रहा कि किसी को नौकरी का पहला दिन ही आखिरी दिन बन गया, तो किसी के हाथ नियुक्ति पत्र तब पहुंचा, जब वह पहले ही सेवानिवृत्त हो चुका था। यह मामला सरकार की कार्यशैली और भर्ती प्रक्रिया की समयबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में है। वर्षों तक चली भर्ती प्रक्रिया में देरी का खामियाजा कई अभ्यर्थियों को इस तरह भुगतना पड़ा कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्ति पत्र मिला, जबकि कुछ अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही दिन रिटायर हो गए। इस मामले ने राज्य की भर्ती व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2023 में 57-58 वर्ष की आयु में आवेदन करने वाले कई अभ्यर्थियों का चयन तो हुआ, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में इतनी देरी हुई कि सेवा का अवसर ही नहीं मिल पाया। जामताड़ा के शिक्षक नंदलाल रवानी को नियुक्ति पत्र मिलने के दूसरे ही दिन सेवानिवृत्त होना पड़ा, जबकि पलामू के नियूम अंसारी को उनका नियुक्ति पत्र सेवानिवृत्ति के बाद प्राप्त हुआ।

क्या कहते है अभ्यर्थी

हाल ही में राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, लेकिन इन मामलों ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता पर बहस तेज कर दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी होती तो उन्हें वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ता और वे अपनी सेवा दे सकते थे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने सरकार पर रोजगार के नाम पर लापरवाही का आरोप लगाया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। �

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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