झारखंड पारा शिक्षक ब्रेकिंग: “पारा शिक्षकों को मिलेगा पेंशन” हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, संविदा सेवा भी पेंशन में जोड़ी जाएगी, 2 महीने में सरकार को लेना होगा फैसला
Jharkhand Para-Teacher Breaking News: High Court's major ruling—para-teachers to receive pensions; contractual service will also be counted towards pension eligibility; government must make a decision within two months.

रांची/1.7.26। झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों को लेकर बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पेंशन अधिकार से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि नियमित नियुक्ति से पहले संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा को भी पेंशन के लिए योग्य सेवा माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने पांच सेवानिवृत्त इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षकों की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उनकी पारा शिक्षक अवधि को नियमित सेवा में जोड़कर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। अदालत ने पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने तथा सेवानिवृत्ति की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया।
पारा शिक्षक से बने नियमित शिक्षक, फिर भी नहीं मिली पेंशन
दरअसल याचिकाकर्ता माणिक चंद्र मंडल, उत्पल कुमार मुखर्जी, अब्दुल हमीद अंसारी, शिव नारायण गुप्ता और मोतीलाल टुडू पहले पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। बाद में चयन प्रक्रिया के तहत उनकी नियमित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई।वर्ष 2025 में सेवानिवृत्ति के समय उनकी नियमित सरकारी सेवा 10 वर्ष से कुछ महीने या कुछ दिन कम थी। इसी आधार पर उन्हें पेंशन का लाभ देने से इनकार कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि पारा शिक्षक के रूप में 8 से 12 वर्षों तक दी गई उनकी निरंतर सेवा को भी पेंशन के लिए जोड़ा जाना चाहिए।
सरकार ने किया विरोध
राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि पारा शिक्षक के रूप में की गई सेवा पूरी तरह संविदा आधारित थी, इसलिए उसे पेंशन योग्य सेवा नहीं माना जा सकता। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं ने नियमित सरकारी सेवा में 10 वर्ष पूरे नहीं किए हैं, इसलिए वे पेंशन के पात्र नहीं हैं।सरकार ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के कुछ पुराने फैसलों का हवाला भी दिया।
हाईकोर्ट ने सरकार की दलील खारिज की
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार स्वयं नियमित शिक्षक भर्ती में 50 प्रतिशत पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित करती रही है और इसके लिए न्यूनतम दो वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य शर्त थी।अदालत ने कहा कि जब नियुक्ति के समय पारा शिक्षक की सेवा को पात्रता माना गया, तो पेंशन के समय उसी सेवा को नकारना उचित नहीं है। सरकार एक आदर्श नियोक्ता होने के नाते दोहरा मापदंड नहीं अपना सकती।अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन कोई अनुग्रह या दया नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी की संविदा सेवा के बाद नियमित नियुक्ति होती है, तो पूर्व की सेवा को पेंशन के लिए जोड़ा जा सकता है।
अदालत ने जिन प्रमुख मामलों का हवाला दिया, उनमें शामिल हैं—
• प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2019)
• हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम शीला देवी (2023)
• एसडी जयप्रकाश बनाम भारत सरकार (2025)
इसके अलावा झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पूर्व निर्णय का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि संविदा या अस्थायी सेवा को पेंशन योग्य सेवा में शामिल करना न्यायसंगत और कानून सम्मत है।
8 सप्ताह में पेंशन और अन्य लाभ देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की पारा शिक्षक अवधि को नियमित सेवा में जोड़कर पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभों की पुनर्गणना की जाए।साथ ही आदेश दिया गया कि यह पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए और सेवानिवृत्ति की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाए।
क्या इस फैसले का असर अन्य राज्यों पर पड़ेगा?
यह निर्णय फिलहाल झारखंड के इस विशेष मामले से संबंधित है, लेकिन इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया है। ऐसे में अन्य राज्यों के संविदा या पारा शिक्षक भी समान परिस्थितियों में इस फैसले का कानूनी आधार के रूप में उल्लेख कर सकते हैं। हालांकि, इसका स्वतः सभी राज्यों पर लागू होना आवश्यक नहीं है।









