Jharkhand IPS Couple: सरकार की मेहरबानी, किस्मत का साथ… फिर भी नहीं बची कुर्सी, 70 दिन में खत्म हो गया ”ड्रीम पोस्टिंग” पीरियड
Jharkhand IPS Couple News: जानिए कैसे सरकार की मेहरबानी और किस्मत से मिली पास-पास जिलों की पोस्टिंग सिर्फ 70 दिन में खत्म हो गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देर रात SSP पीयूष पांडेय और SP निधि द्विवेदी को हटा दिया।

रिपोर्ट- प्रिया आनंद
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आधी रात लिए गए फैसले में पूर्वी सिंहभूम के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की SP निधि द्विवेदी को एक साथ हटा दिया गया। दोनों आईपीएस अधिकारी पति-पत्नी हैं और महज 70-80 किलोमीटर की दूरी वाले जिलों की कमान संभाल रहे थे। ब्यूरोक्रेसी में ऐसी पोस्टिंग बेहद दुर्लभ मानी जाती है। लेकिन सरकार की मेहरबानी और किस्मत से मिला यह सुनहरा मौका सिर्फ 70 दिन में खत्म हो गया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों अधिकारियों को एक साथ मुख्यालय अटैच कर दिया गया?
रांची। ब्यूरोक्रेसी में इत्तेफाक बहुत कम देखने को मिलता है, जब पति-पत्नी दोनों को एक साथ जिले की कप्तानी मिल जाए। उस पर संयोग ऐसा हो कि दोनों के जिले भी एक-दूसरे से महज 70-80 किलोमीटर की दूरी पर हों। यानी चाहें तो रोज मिल सकते हैं, परिवार के साथ समय बिता सकते हैं और अपने-अपने जिलों की जिम्मेदारी भी निभा सकते हैं। यह अवसर हर आईपीएस अधिकारी को नहीं मिलता। पूरी सर्विस निकल जाती है, लेकिन पति-पत्नी को एक साथ जिला कमांड मिलना तो दूर, एक ही प्रमंडल में पोस्टिंग भी नसीब नहीं होती।
ऐसा मौका सिर्फ किस्मत से नहीं मिलता, इसके पीछे सरकार का भरोसा भी होता है। लेकिन जब सरकार की मेहरबानी और किस्मत से मिला ऐसा सुनहरा अवसर भी कोई अफसर दंपत्ति भुना नहीं पाए, तो फिर इसे बदकिस्मती ही कहा जाएगा।
कुछ ऐसा ही हुआ पूर्वी सिंहभूम के तत्कालीन एसएसपी पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी के साथ। मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोनों अधिकारियों को एक साथ हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया। खास बात यह रही कि शुरुआत में कार्रवाई सिर्फ पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी पर तय मानी जा रही थी, लेकिन सरायकेला में देर रात हुई एक और गंभीर आपराधिक घटना के बाद सरकार ने दोनों अधिकारियों को हटाने का फैसला ले लिया।
पिछले वर्ष मई के अंतिम सप्ताह में सरकार ने किशोर कौशल की जगह 2014 बैच के आईपीएस पीयूष पांडेय को पूर्वी सिंहभूम का एसएसपी बनाया था। वहीं उनकी पत्नी 2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी ने इसी वर्ष 19 अप्रैल को सरायकेला-खरसावां की एसपी का पदभार संभाला था। दोनों जिलों की सीमाएं आपस में जुड़ी हैं और दूरी भी महज डेढ़ घंटे की है। लेकिन यह ‘ड्रीम पोस्टिंग’ ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। निधि द्विवेदी की जिले में तैनाती के करीब 70 दिन बाद ही दोनों को एक साथ हटाने का आदेश जारी हो गया।
जानिये कौन हैं SSP पीयूष पांडेय
2014 बैच के आईपीएस पीयूष पांडेय झारखंड पुलिस के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले पीयूष इंजीनियरिंग (बीटेक) की पढ़ाई के बाद यूपीएससी के जरिए आईपीएस बने। वह इससे पहले लातेहार, बोकारो और रामगढ़ जैसे जिलों के एसपी रह चुके हैं। रांची ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली। वर्ष 2019-20 के दौरान वे पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण एसपी भी रहे थे। उसी अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें जिले का एसएसपी बनाया था।
इंजीनियर से आईपीएस बनीं निधि द्विवेदी
2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी भी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आती हैं। उत्तर प्रदेश की रहने वाली निधि ने बीई करने के बाद यूपीएससी पास किया और झारखंड कैडर मिला। उन्होंने सीआईडी में लंबा कार्यकाल बिताया। इसके बाद पाकुड़ की एसपी बनीं और इसी साल अप्रैल में सरायकेला-खरसावां की कमान सौंपी गई। जिले में बेहतर पुलिसिंग और प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनकी पहचान बनाई जा रही थी, लेकिन उनका कार्यकाल भी तीन महीने पूरा होने से पहले ही समाप्त हो गया।
सिर्फ 70 दिन में खत्म हो गई ‘ड्रीम पोस्टिंग’
पिछले वर्ष मई के अंतिम सप्ताह में सरकार ने किशोर कौशल की जगह 2014 बैच के आईपीएस पीयूष पांडेय को पूर्वी सिंहभूम का एसएसपी बनाया था। वहीं 2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी ने 19 अप्रैल 2026 को सरायकेला-खरसावां की एसपी का कार्यभार संभाला था।दोनों जिलों की दूरी करीब 70 से 80 किलोमीटर है। ऐसे में यह पोस्टिंग प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। लेकिन निधि द्विवेदी का कार्यकाल तीन महीने भी पूरा नहीं कर सका और करीब 70 दिन में ही दोनों अधिकारियों की कुर्सी चली गई।
अपराध और कानून-व्यवस्था बनी बड़ी वजह
सूत्रों के मुताबिक, जमशेदपुर में करणी सेना नेता हिमांशु कुमार सिंह की पुलिस की मौजूदगी में हुई हत्या और लगातार बढ़ते अपराधों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। वहीं सरायकेला में भी लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने सरकार की किरकिरी कराई। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश देने के लिए देर रात दोनों अधिकारियों को एक साथ हटाने का फैसला लिया।
दोनों अधिकारियों का एक साथ हटना सिर्फ एक ट्रांसफर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ब्यूरोक्रेसी में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पति-पत्नी को एक साथ पड़ोसी जिलों की कमान मिलना अपने आप में दुर्लभ होता है। लेकिन प्रशासनिक सेवा में अंतिम कसौटी हमेशा प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था ही होती है।









