झारखंड: कर्मचारियों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वित्तीय उन्नयन का अधिकार सेवा पुष्टि या विभागीय परीक्षा पर निर्भर नहीं, सरकार की अपील खारिज
झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि ACP और MACP का लाभ देने के लिए विभागीय परीक्षा या सेवा पुष्टि अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर कर्मचारी मोहन रजक को राहत दी।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया है। महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) और मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) का लाभ देने के लिए विभागीय परीक्षा पास करना या सेवा की पुष्टि (Confirmation) अनिवार्य शर्त नहीं हो सकती।
अदालत ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य पदोन्नति के अवसर नहीं मिलने पर कर्मचारियों को समयबद्ध वित्तीय उन्नयन देना है, इसलिए पदोन्नति से जुड़ी शर्तें इन पर लागू नहीं की जा सकतीं।मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से दायर लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) को खारिज करते हुए एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा।
क्या था मामला
दरअसल ये मामला ग्रामीण कार्य विभाग के कर्मचारी मोहन रजक से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति 1 मार्च 1988 को जूनियर अकाउंट्स क्लर्क के पद पर हुई थी। सेवा के दौरान उन्हें 1 मार्च 2000 से प्रथम एसीपी और 1 सितंबर 2008 से द्वितीय एमएसीपी का लाभ मिल चुका था।
30 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद उन्होंने तृतीय एमएसीपी की मांग की। इसी बीच विभाग ने यह कहते हुए पहले दिए गए वित्तीय लाभों में संशोधन कर दिया कि उन्होंने विभागीय लेखा परीक्षा का पांचवां प्रश्नपत्र 31 जुलाई 2022 को पास किया था, इसलिए उनकी सेवा की पुष्टि 1 अगस्त 2022 से मानी जाएगी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ACP और MACP योजनाएं कर्मचारियों को वित्तीय प्रगति देने के लिए बनाई गई हैं, न कि पदोन्नति देने के लिए। इसलिए विभागीय परीक्षा या सेवा पुष्टि जैसी शर्तों के आधार पर इनका लाभ रोका या वापस नहीं लिया जा सकता।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2018 के सेवा नियमों का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को पहले से मिल चुके वित्तीय लाभ वापस लेना कानूनन उचित नहीं है।
सरकार को दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि मोहन रजक की सेवा की पुष्टि उनकी नियुक्ति तिथि से मानी जाए। साथ ही उन्हें प्रथम और द्वितीय एसीपी/एमएसीपी का लाभ यथावत रखा जाए तथा 30 वर्ष की सेवा पूरी होने की तिथि से तृतीय एमएसीपी का लाभ भी प्रदान किया जाए।इस फैसले को झारखंड के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे ऐसे मामलों में विभागीय परीक्षा और सेवा पुष्टि को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।









