Crime News: वासेपुर के फरार गैंगस्टर शब्बीर ने छत्तीसगढ़ में भी बना ली थी करोड़ों की सपत्ति, 13 साल से छुपकर बस-एंबुलेंस करोबार के साथ रियल एस्टेट का भी करने लगा था धंधा
धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम के 13 साल तक अंबिकापुर में छिपे रहने का खुलासा हुआ है। बस, एंबुलेंस और रियल एस्टेट में करोड़ों का नेटवर्क खड़ा करने के मामले में उसके सहयोगी बैदुल खान पर एफआईआर दर्ज की गई है।

धनबाद/अंबिकापुर। वासेपुर का गैंगस्टर शब्बीर 13 साल से छुपकर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रह रहा था, ये बातें उतनी हैरान करने वाली नहीं है, जितनी हैरान करने वाली उसकी अंबिकापुर में बनायी करोड़ों की संपत्ति है। तीन मंजिला मकान, बस व एंबुलेंस का संचालन के साथ-साथ करोड़ों के रियल एस्टेट का कारोबार, ये बताता है कि गैंगस्टर शब्बीर को ये मालूम चल चुका था कि अब वो कभी पकड़ा नहीं जायेगा। झारखंड के धनबाद (वासेपुर) का कुख्यात गैंगस्टर और दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाया शब्बीर आलम पिछले 13 वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रह रहा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उसने बस संचालन, एंबुलेंस सेवा और रियल एस्टेट के कारोबार में करोड़ों रुपये का नेटवर्क खड़ा कर लिया। मामले में सरगुजा पुलिस ने उसके सहयोगी और बस संचालक बैदुल खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं, फरार गैंगस्टर की तलाश जारी है। लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
13 साल तक अंबिकापुर में बदल ली पहचान
जानकारी के अनुसार, शब्बीर आलम वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान फरार हो गया था। इसके बाद वह अपने सहयोगी जावेद के साथ अंबिकापुर पहुंचा और स्थानीय बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। आरोप है कि बैदुल खान ने उसे न केवल पनाह दी, बल्कि बस कारोबार में साझेदार भी बना लिया।पुलिस के अनुसार, शब्बीर आलम अंबिकापुर में परिवार के साथ रह रहा था और उसने यहां आलीशान मकान बनाकर करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली थी।
बस, एंबुलेंस और रियल एस्टेट में फैलाया कारोबार
जांच में सामने आया है कि गैंगस्टर बस संचालन के अलावा 40 से अधिक एंबुलेंस का संचालन भी कर रहा था। इसके साथ ही खरसिया नाका क्षेत्र में जमीन खरीदकर प्लॉटिंग का कारोबार भी शुरू कर दिया था। पुलिस को आशंका है कि इन कारोबारों में अपराध से अर्जित धन का निवेश किया गया।बताया जा रहा है कि शब्बीर आलम अपने सहयोगियों के साथ राजहंस बस सर्विस का संचालन कर रहा था। बिहार और छत्तीसगढ़ के विभिन्न रूटों पर बसें भी संचालित की जा रही थीं।
झारखंड पुलिस की दबिश से पहले फिर हुआ फरार
करीब तीन दिन पहले झारखंड पुलिस शब्बीर आलम की गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन छापेमारी से पहले ही वह अपने सहयोगी के साथ फरार हो गया। इसके बाद सरगुजा पुलिस ने उसके सहयोगियों और आर्थिक नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
सहयोगी बैदुल खान पर दर्ज हुई FIR
सरगुजा पुलिस ने बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि उसने यह जानते हुए भी शब्बीर आलम को शरण दी कि वह धनबाद पुलिस द्वारा घोषित भगोड़ा अपराधी है।सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपी की तलाश के साथ उसके आर्थिक नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भी पड़ताल की जा रही है।
दोहरे हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद
शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद आलम और अन्य साथियों पर 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। इस दोहरे हत्याकांड में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2013 में अदालत में पेशी के दौरान वह फरार हो गया था।
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से जुड़ा है मामला
धनबाद के कोयला माफिया और गैंगवार की पृष्ठभूमि पर बनी चर्चित फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ भी इसी क्षेत्र के आपराधिक संघर्षों से प्रेरित मानी जाती है। शब्बीर आलम का नाम भी उसी दौर के चर्चित गैंगवार से जुड़ा रहा है।








