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Jharkhand Promotion Rules: झारखंड में प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव, अब प्रोबेशन पूरा होने के बाद ही शुरू होगी सेवा अवधि की गिनती

झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद ही प्रमोशन के लिए सेवा अवधि की गणना होगी। सचिवालय सेवा संघ ने फैसले का विरोध किया है।

रांची। झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को झटका लगना तय है। सरकार ने तय किया है कि अब किसी भी सरकारी कर्मचारी की प्रोन्नति के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि की गणना प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि पूरी होने के बाद ही शुरू होगी। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में संशोधित संकल्प जारी कर दिया। इस प्रस्ताव को 2 जुलाई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई थी।

प्रोबेशन पूरा होने के बाद ही मिलेगी प्रमोशन की पात्रता

प्रमोशन को लेकर बनाये नए नियम के अनुसार, जिन पदों पर दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि निर्धारित है और अगले पद पर पदोन्नति के लिए दो या तीन वर्ष की सेवा अनिवार्य है, वहां अब दोनों अवधियों को अलग-अलग माना जाएगा। यानी कर्मचारी पहले अपनी प्रोबेशन अवधि पूरी करेगा, उसके बाद ही प्रमोशन के लिए आवश्यक सेवा अवधि की गणना शुरू होगी।

पहली प्रोन्नति के लिए अब करना होगा ज्यादा इंतजार

संशोधित नियम के तहत यदि किसी कर्मचारी का मूल पद 4800 रुपये ग्रेड पे का है और पहली पदोन्नति 5400 रुपये ग्रेड पे वाले पद पर होनी है, जहां दो वर्ष की सेवा आवश्यक है, तो अब कर्मचारी को कुल चार वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। इसमें पहले दो वर्ष प्रोबेशन और उसके बाद दो वर्ष नियमित सेवा शामिल होगी। पहले कई मामलों में दोनों अवधियां एक साथ पूरी हो जाती थीं।

सरकार ने बताई बदलाव की वजह

राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई सेवाओं में प्रोबेशन और पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि लगभग एक साथ पूरी हो रही थी, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया। इसी विसंगति को दूर करने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किया गया है।

किन सेवाओं पर लागू होगा नया नियम?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्रेड पे के बीच प्रोन्नति की अवधि वर्ष 2014 के संकल्प में निर्धारित नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी। वहीं जिन सेवा नियमावलियों में पहले से अलग व्यवस्था लागू है, वहां वही नियम प्रभावी रहेंगे। जिन सेवाओं में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां संशोधित संकल्प के प्रावधान लागू होंगे।

सचिवालय सेवा संघ ने जताया विरोध

सरकार के इस फैसले का झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने विरोध किया है। संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर संशोधित संकल्प को तत्काल वापस लेने की मांग की है।संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में लागू किए गए नियमों का उद्देश्य सभी सेवा संवर्गों में प्रोन्नति की अवधि में समानता लाना था। नए संशोधन से यह व्यवस्था प्रभावित होगी और विभिन्न सेवाओं के बीच असमानता बढ़ेगी।

आठ साल तक करना पड़ सकता है इंतजार

सचिवालय सेवा संघ के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद कुछ सेवाओं में कर्मचारियों को लेवल-7 से लेवल-8 तक पदोन्नति के लिए केवल दो वर्ष इंतजार करना होगा, जबकि झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को आठ वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। संघ ने सरकार से पुराने प्रावधान को यथावत रखने की मांग की है ताकि सभी सेवा संवर्गों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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