CMPF Rules 2026: कोयला खदानों के कर्मचारियों के PF नियमों में बड़ा बदलाव, उल्लंघन पर ऐसे लगेगा जुर्माना, 30 दिन में कर सकेंगे अपील
कोयला मंत्रालय ने CMPF Rules 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। अब कोयला खदानों में PF नियमों के उल्लंघन पर नोटिस, सुनवाई, जुर्माना और 30 दिन में अपील की स्पष्ट प्रक्रिया लागू होगी।

CMPF Rules 2026। कोयला खदानों में कार्यरत कर्मचारियों से जुड़ी एक अहम खबर है। कोलकर्मियों के भविष्य निधि (CMPF) से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। कोयला मंत्रालय ने ‘कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस (एडजुडिकेशन ऑफ पेनाल्टीज एंड अपील) रूल्स, 2026’ का मसौदा जारी किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक नए ड्राफ्ट नियमों में पहली बार यह स्पष्ट किया गया है कि कानून के उल्लंघन की जांच कैसे होगी, जुर्माना किस प्रक्रिया से लगाया जाएगा और संबंधित व्यक्ति या कंपनी को अपील का क्या अधिकार मिलेगा। फिलहाल मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
स्वत: संज्ञान पर भी हो सकेगी अब जांच
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, यदि एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को यह लगता है कि किसी कंपनी, नियोक्ता, ठेकेदार या अन्य संबंधित व्यक्ति ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस एक्ट, 1948 या उसके तहत बनी किसी योजना का उल्लंघन किया है, तो वह स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेने के साथ-साथ शिकायत, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुपालन रिपोर्ट या अन्य रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू कर सकेगा। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर, रिटर्न और अन्य रिकॉर्ड भी मांगे जा सकेंगे।
जुर्माना को लेकर भी नया नियम लागू
सरकार ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था पर सीधे जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो पहले फॉर्म-1 के जरिए नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें उल्लंघन का पूरा विवरण, संबंधित कानूनी प्रावधान, मांगे गए दस्तावेज और जवाब देने की समय-सीमा का उल्लेख होगा। जवाब देने के लिए सामान्य तौर पर 15 से 30 दिन का समय दिया जाएगा।
सुनवाई में कर्मचारियों को मिलेगी सुविधा
ड्राफ्ट नियमों में सुनवाई की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। संबंधित व्यक्ति स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पक्ष रख सकेगा। सुनवाई फिजिकल के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से भी कराई जा सकेगी। यदि नोटिस मिलने के बाद भी कोई जवाब नहीं देता या सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो अधिकारी एक्स-पार्टी आदेश भी पारित कर सकता है।
इन आधारों पर तय होगा जुर्माना
नए नियमों में पहली बार जुर्माना तय करने के स्पष्ट मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं—
• उल्लंघन की गंभीरता और अवधि
• प्रभावित कर्मचारियों या पेंशनभोगियों की संख्या
• पहले भी ऐसा उल्लंघन हुआ है या नहीं
• नियम तोड़कर प्राप्त किया गया अनुचित लाभ
• सार्वजनिक हित या फंड को हुई क्षति
• गलती जानबूझकर की गई या नहीं
• जांच में संबंधित पक्ष का सहयोग
हर आदेश में कारण बताना होगा अनिवार्य
एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को हर मामले में कारणयुक्त (Reasoned) आदेश जारी करना होगा। यदि जांच में उल्लंघन साबित नहीं होता तो मामला बंद कर दिया जाएगा। वहीं दोष सिद्ध होने पर अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। आदेश में यह भी स्पष्ट करना होगा कि जुर्माना कब और कैसे जमा करना है तथा अपील की प्रक्रिया क्या होगी।
30 दिन के भीतर कर सकेंगे अपील
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संस्था आदेश से संतुष्ट नहीं है तो वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकेगा। पर्याप्त कारण होने पर विलंब से दायर अपील भी स्वीकार की जा सकती है। सरकार ने प्रयास किया है कि ऐसी अपीलों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाए।









