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Jharkhand Secretariat Employees Protest: झारखंड कर्मचारी सरकार से क्यों हैं नाराज? प्रमोशन, नये पहत सहित ये है प्रमुख मांगें, 4 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, संघ ने दी सरकार को प्रदर्शन जानकारी

झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने लंबित मांगों को लेकर 4 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। 5 अगस्त को मानव श्रृंखला और 6 से 12 अगस्त तक काला बैज सप्ताह मनाया जाएगा।

रांची। झारखंड में एक बार फिर नाराज कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। झारखंड सचिवालय सेवा के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संघ ने 4 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।

संघ ने बताया है कि ये आंदोलन चरणबद्ध रहेगा। आंदोलन की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर न्यायपूर्ण संघर्ष के संकल्प के साथ होगी। इस संबंध में झारखंड सचिवालय सेवा संघ के महासचिव राजेश कुमार सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर आंदोलन की रूपरेखा और कर्मचारियों की चार सूत्रीय मांगों से अवगत करा दिया है।

4 अगस्त को श्रद्धांजलि, 5 अगस्त को मानव श्रृंखला

संघ के अनुसार, आंदोलन के पहले दिन 4 अगस्त को प्रोजेक्ट भवन और नेपाल हाउस सचिवालय परिसर में दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे तक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसके अगले दिन 5 अगस्त को दोनों परिसरों में कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।

6 से 12 अगस्त तक काला बैज लगाकर करेंगे काम

आंदोलन के तीसरे चरण में 6 अगस्त से 12 अगस्त तक ‘काला बैज सप्ताह’ मनाया जाएगा। इस दौरान सचिवालय सेवा के सभी कर्मचारी काला बैज लगाकर अपने नियमित शासकीय कार्य करेंगे। साथ ही प्रतिदिन दोपहर 1:30 से 2 बजे तक कर्मचारियों के बीच संवाद और जनसंपर्क अभियान भी चलाया जाएगा।

सरकार पर उपेक्षा का आरोप

संघ का आरोप है कि कार्मिक विभाग लगातार सचिवालय सेवा के हितों के विपरीत निर्णय ले रहा है। कई बार मांगें उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसी वजह से कर्मचारियों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन का रास्ता चुना है।

ये हैं सचिवालय कर्मियों की प्रमुख मांगें

संघ ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
• संयुक्त सचिव और उप सचिव के नए पदों का शीघ्र सृजन किया जाए।
• लंबित प्रोन्नति (प्रमोशन) मामलों का तत्काल निपटारा कर सभी पात्र कर्मचारियों को लाभ दिया जाए।
• कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सचिवालय सेवा संघ का पक्ष सुना जाए।
• सचिवालय सेवा से जुड़े निर्णय कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएं।

आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा

संघ का कहना है कि पूरा आंदोलन लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर किया जाएगा। यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगे आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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