9 साल बाद लौटी पत्नी… पति ने देखा तो छलक पड़े आंसू, 2017 में अचानक हो गयी थी गायब, फिर इस हाल में मिली
2017 से लापता सुषमा नौ साल बाद अपने पति मनोज गिरी से मिलीं। कर्नाटक से मिली सूचना के बाद प्रशासन ने परिवार का पुनर्मिलन कराया। भावुक कर देने वाली पूरी कहानी पढ़ें।

Police News: कहते हैं कि अगर उम्मीद जिंदा हो तो बिछड़े रिश्ते भी एक दिन लौट आते हैं। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में शुक्रवार को ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। साल 2017 में अचानक लापता हुई सुषमा नौ साल बाद अपने पति मनोज गिरी से मिलीं। जैसे ही दोनों आमने-सामने आए, वर्षों की जुदाई आंसुओं में बदल गई। बिना कुछ कहे दोनों एक-दूसरे को देखते रहे और उनकी आंखों से बहते आंसुओं ने नौ साल की दूरी पलभर में मिटा दी।
परिवार ने छोड़ दी थी लौटने की उम्मीद
पूरा मामला सिकटा प्रखंड के विशम्भरा गांव निवासी मनोज गिरी की शादी वर्ष 2005 में सुषमा से हुई थी। परिवार खुशहाल था, लेकिन वर्ष 2017 में अचानक सुषमा अपने एक बच्चे के साथ घर से चली गईं। उस समय उनके चार बच्चे थे और वह गर्भवती भी थीं।परिजनों ने हर संभव जगह तलाश की, रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन सुषमा का कोई पता नहीं चला। धीरे-धीरे परिवार ने यह मान लिया कि शायद अब वह कभी वापस नहीं लौटेंगी।
कर्नाटक से आई एक सूचना ने बदल दी किस्मत
कहानी में नया मोड़ तब आया जब कर्नाटक के वन स्टॉप सेंटर से पश्चिम चंपारण प्रशासन को सूचना मिली कि वहां सुषमा नाम की एक महिला रह रही हैं। वह अपनी पूरी पहचान तो नहीं बता पा रही थीं, लेकिन उन्हें अपने पति का नाम और गांव याद था।
इसके बाद प्रशासन ने गोपालपुर थाना की मदद से पहचान की प्रक्रिया शुरू की। फरवरी 2026 में मनोज गिरी को बेतिया बुलाकर वीडियो कॉल कराई गई। मोबाइल स्क्रीन पर पत्नी को देखते ही मनोज ने तुरंत उन्हें पहचान लिया। वर्षों से बिछड़ी पत्नी को देखकर उनकी आंखें भर आईं और उन्होंने प्रशासन से उन्हें सुरक्षित घर लाने की गुहार लगाई।
आखिरकार पूरा हुआ इंतजार
सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शुक्रवार को बेतिया के सखी वन स्टॉप सेंटर में वह पल आया, जिसका इंतजार परिवार ने वर्षों तक किया था।जैसे ही सुषमा अपने पति के सामने पहुंचीं, दोनों खुद को रोक नहीं सके। किसी फिल्मी दृश्य की तरह दोनों की आंखों से आंसू बहने लगे। वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी इस भावुक पल को देखकर भावुक हो उठे।वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी रोचना माद्री की मौजूदगी में सभी औपचारिकताएं पूरी कर सुषमा को उनके पति के सुपुर्द कर दिया गया।
अभी दो बेटियों से मिलना बाकी
सखी वन स्टॉप सेंटर की केन्द्र प्रशासक रश्मि कुमारी ने बताया कि सुषमा की दो बेटियां फिलहाल कर्नाटक की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में हैं। प्रशासन उन्हें भी जल्द परिवार से मिलाने की प्रक्रिया में जुटा है।परिवार को उम्मीद है कि जल्द ही उनकी बेटियां भी घर लौटेंगी और नौ साल पहले बिखरा यह परिवार फिर से पूरी तरह एक हो जाएगा।
इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल
रोचना माद्री ने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल संकटग्रस्त महिलाओं को संरक्षण देने का ही काम नहीं करता, बल्कि जहां संभव हो उन्हें सम्मानपूर्वक उनके परिवार से मिलाने का प्रयास भी करता है। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय प्रयासों का बेहतरीन उदाहरण बताया।
नौ साल की जुदाई, अनगिनत इंतजार और टूटती उम्मीदों के बाद हुआ यह मिलन केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि इस बात का भी संदेश है कि कई बार जिंदगी उन कहानियों को भी सच कर देती है, जिन्हें लोग सिर्फ फिल्मों में संभव मानते हैं।








