School Education News: झारखंड में 9,827 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे, संसद में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
UDISE+ 2025-26 के अनुसार झारखंड में 9,827 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। राज्य इस मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। शिक्षा मंत्रालय ने संसद में आंकड़े पेश किए।

Education News: झारखंड में 9,827 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे, संसद में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
रांची: झारखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का हाल कैसा है ? इसे लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। संसद में शिक्षा मंत्री ने जो आंकड़े दिये हैं, वो ना सिर्फ बेहद हैरान करने वाले हैं, बल्कि ये इशारा भी कर रहे हैं कि झारखंड में आखिरकार सरकारी स्कूल किस हाल में संचालित हो रहे हैं।
UDISE+ 2025-26 के अनुसार राज्य में 9,827 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। इस मामले में झारखंड देश में दूसरे स्थान पर है। सबसे अधिक एक शिक्षक वाले स्कूल आंध्र प्रदेश में हैं, जबकि महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान यह जानकारी दी। देशभर में ऐसे स्कूलों की कुल संख्या 1,00,843 बताई गई है, जिनमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूल शामिल हैं।
झारखंड में शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ी चिंता
झारखंड लंबे समय से शिक्षकों की कमी और दूरदराज के इलाकों में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों से जूझ रहा है। राज्य के कई ग्रामीण, आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी एक ही शिक्षक पूरी स्कूल व्यवस्था संभाल रहे हैं।
ऐसे शिक्षकों को एक साथ कई कक्षाओं को पढ़ाने के अलावा प्रशासनिक कार्य, रिकॉर्ड संधारण और मिड-डे मील जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों की सीखने की गुणवत्ता प्रभावित होती है और नई शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
देश में सबसे ज्यादा एक शिक्षक वाले स्कूल किन राज्यों में?
UDISE+ 2025-26 के अनुसार सबसे अधिक एक शिक्षक वाले स्कूल इन राज्यों में हैं—
राज्य स्कूलों की संख्या
आंध्र प्रदेश 16,357
झारखंड 9,827
महाराष्ट्र 9,269
कर्नाटक 8,042
उत्तर प्रदेश 7,874
राजस्थान 7,200
पश्चिम बंगाल 6,769
इन सात राज्यों में ही देश के करीब 65 प्रतिशत एकल-शिक्षक स्कूल मौजूद हैं।
छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों की भी स्थिति चिंताजनक
झारखंड के अलावा कई राज्यों में भी हजारों स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
• तेलंगाना – 4,793
• तमिलनाडु – 3,957
• असम – 3,159
• हिमाचल प्रदेश – 3,128
• उत्तराखंड – 2,655
• छत्तीसगढ़ – 2,461
सबसे बेहतर स्थिति किन राज्यों की?
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या बेहद कम है।
• केरल – 67
• नागालैंड – 35
• सिक्किम – 31
• लद्दाख – 28
• दिल्ली – 7
• अंडमान एवं निकोबार – 1
सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती और उनकी नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। शिक्षकों के पद खाली रहने के पीछे सरकार ने कई कारण बताए हैं—
• शिक्षकों का सेवानिवृत्त होना
• इस्तीफा देना
• नए पदों का सृजन और पुनर्गठन
• ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में नामांकन के अनुसार पदों का समायोजन
सरकार का कहना है कि राज्यों को नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी जाती है तथा समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात क्या कहता है?
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार देश का औसत Student-Teacher Ratio (STR) अभी निर्धारित मानकों के भीतर है।
• प्राथमिक स्तर – 19 छात्रों पर 1 शिक्षक
• उच्च प्राथमिक – 17 छात्रों पर 1 शिक्षक
• माध्यमिक – 15 छात्रों पर 1 शिक्षक
• उच्च माध्यमिक – 23 छात्रों पर 1 शिक्षक
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय औसत वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता, क्योंकि झारखंड जैसे राज्यों के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में एक शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी एक साथ निभानी पड़ती है।








