Jharkhand High Court: बीमार शिक्षक को मेडिकल लीव से लौटते ही कर दिया बर्खास्त, 20 साल पुराने शिक्षक मामले में आदेश नहीं मानने पर पलामू DC तलब, जानें पूरा मामला
झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक नंदू राम मामले में आदेश का पालन नहीं होने पर पलामू के उपायुक्त को 2 सितंबर को तलब किया है। जानिए पूरा मामला और कोर्ट की सख्त टिप्पणी।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम से जुड़े करीब दो दशक पुराने मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने आदेश का पालन नहीं करने पर उपायुक्त को तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब एकल पीठ का फैसला और उसके खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील दोनों ही खारिज हो चुकी हैं, तो फिर अब तक आदेश का पूरा पालन क्यों नहीं किया गया।मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पलामू के उपायुक्त (DC) को 2 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को पलामू जिले के सरकारी मध्य विद्यालय, विश्रामपुर में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। करीब पांच साल तक सेवा देने के बाद वे गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित हो गए और लंबे समय तक इलाज के कारण चिकित्सकीय अवकाश पर रहे।
इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया। इसके बाद 19 जनवरी 2012 को उन्होंने दोबारा स्कूल में योगदान देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में विभाग ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
शिक्षक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए नंदू राम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षक को पुनर्बहाल किया जाए तथा पुनर्बहाली से पहले की अवधि का वेतन और सभी सेवा लाभ भी दिए जाएं।राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की, लेकिन वह भी खारिज हो गई। इसके बावजूद आदेश का पूरा पालन नहीं होने पर शिक्षक ने अवमानना याचिका दाखिल की।
कोर्ट में पेश हुए जिला शिक्षा अधीक्षक
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए और अपना जवाब दाखिल किया।हालांकि, अदालत उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
शिक्षक ने सभी बकाया सेवा लाभ देने की मांग की
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने अदालत को बताया कि नंदू राम को नौकरी में वापस तो ले लिया गया है, लेकिन पुनर्बहाली से पहले की अवधि का वेतन, एरियर और अन्य सेवा लाभ अब तक नहीं दिए गए हैं।उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट आदेश दे चुका है कि शिक्षक को सभी वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ दिए जाएं, लेकिन विभाग ने अब तक आदेश का पूरा पालन नहीं किया।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि जब एकल पीठ का आदेश भी बरकरार है और सरकार की अपील भी खारिज हो चुकी है, तो आदेश के अनुपालन में आखिर देरी क्यों की जा रही है।
कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए पलामू के उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया।
2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। उस दिन पलामू के उपायुक्त को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि न्यायालय के आदेश का पूर्ण पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।इस मामले की अगली सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत आगे की कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपना सकती है।








