कम पानी पीना सिर्फ प्यास नहीं, हार्ट पर भी डाल सकता है असर; जानें डिहाइड्रेशन के खतरे और बचाव
डिहाइड्रेशन सिर्फ प्यास और मुंह सूखने की समस्या नहीं है। शरीर में पानी की कमी से हार्ट, किडनी और दिमाग पर असर पड़ सकता है। जानें लक्षण, खतरे और बचाव के उपाय।

हेल्थ डेस्क। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पानी सबसे जरूरी चीजों में शामिल है। अक्सर लोग पानी की कमी को सिर्फ प्यास या मुंह सूखने तक सीमित समझते हैं, लेकिन डिहाइड्रेशन (Dehydration) का असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। पर्याप्त पानी न मिलने पर शरीर में ब्लड वॉल्यूम कम हो सकता है, जिससे दिल को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
गर्मी, ज्यादा पसीना आना, उल्टी-दस्त, बुखार, लंबे समय तक एक्सरसाइज या दिनभर बहुत कम पानी पीना शरीर में पानी की कमी की वजह बन सकता है। गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में चक्कर, कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और हीट से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में समय रहते शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करना जरूरी है।
क्या डिहाइड्रेशन से हार्ट पर पड़ता है असर?
शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त की मात्रा कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में दिल को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इसके कारण हार्ट रेट बढ़ने, कमजोरी और ब्लड प्रेशर में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेष रूप से गर्मी में लंबे समय तक पसीना निकलने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं पीने पर शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हृदय या ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या है, उन्हें डिहाइड्रेशन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
हालांकि, सिर्फ कम पानी पीने से सीधे हार्ट अटैक होना तय नहीं है। लेकिन गंभीर डिहाइड्रेशन शरीर पर अतिरिक्त तनाव डाल सकता है और कुछ लोगों में हृदय संबंधी जोखिम को बढ़ा सकता है। सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी या तेज धड़कन जैसे लक्षण होने पर इसे केवल पानी की कमी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किडनी पर भी पड़ सकता है दबाव
किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होने पर पेशाब कम और अधिक गाढ़ा हो सकता है। लंबे समय तक पर्याप्त हाइड्रेशन न मिलने पर किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।गंभीर डिहाइड्रेशन में किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पेशाब का रंग बहुत गहरा होना या सामान्य से काफी कम पेशाब आना शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है।
चक्कर और लो ब्लड प्रेशर की समस्या
डिहाइड्रेशन के दौरान ब्लड वॉल्यूम कम होने से कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर गिर सकता है। इसके कारण अचानक उठने पर चक्कर आना, कमजोरी, थकान या बेहोशी जैसी परेशानी हो सकती है।बुजुर्गों, बच्चों, ज्यादा शारीरिक मेहनत करने वालों और गर्म वातावरण में काम करने वाले लोगों को पानी की कमी से विशेष रूप से बचना चाहिए।
हीट स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा
पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। गर्मी में पसीने के जरिए शरीर लगातार पानी और कुछ इलेक्ट्रोलाइट्स खोता है। अगर इसकी भरपाई नहीं की जाए तो शरीर का तापमान बढ़ सकता है।गंभीर स्थिति में हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक जैसी समस्या हो सकती है। तेज गर्मी में सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, भ्रम, बहुत ज्यादा गर्म शरीर या बेहोशी जैसे लक्षण गंभीर संकेत हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
दिमाग की कार्यक्षमता पर भी असर
डिहाइड्रेशन का असर मानसिक क्षमता पर भी पड़ सकता है। पानी की कमी होने पर सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
कैसे पहचानें शरीर में पानी की कमी?
डिहाइड्रेशन के कुछ सामान्य संकेतों में शामिल हैं:
• बहुत ज्यादा प्यास लगना
• मुंह और होंठ सूखना
• पेशाब का रंग गहरा होना
• सामान्य से कम पेशाब आना
• कमजोरी और अत्यधिक थकान
• चक्कर या सिरदर्द
• गर्मी में अत्यधिक कमजोरी महसूस होना
गंभीर लक्षण जैसे भ्रम, बेहोशी, बहुत कम पेशाब, तेज धड़कन या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
डिहाइड्रेशन से बचने के आसान तरीके
प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहना बेहतर है। गर्मी, एक्सरसाइज या ज्यादा पसीना आने की स्थिति में शरीर को अतिरिक्त तरल पदार्थों की जरूरत हो सकती है।
नारियल पानी, छाछ और पानी से भरपूर फल भी आहार में शामिल किए जा सकते हैं। उल्टी या दस्त की स्थिति में केवल पानी के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ओआरएस (ORS) जैसे इलेक्ट्रोलाइट घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि हर व्यक्ति के लिए रोजाना पानी की एक निश्चित मात्रा जरूरी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र, खान-पान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरत अलग-अलग हो सकती है। कुछ किडनी या हृदय रोगों में डॉक्टर तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह भी दे सकते हैं।
कब समझें कि मामला गंभीर है?
अगर पानी पीने के बावजूद कमजोरी, चक्कर या अन्य गंभीर लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। खासकर सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम या बहुत तेज धड़कन को केवल डिहाइड्रेशन मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष: शरीर में पानी की कमी छोटी समस्या लग सकती है, लेकिन गंभीर डिहाइड्रेशन दिल, किडनी, दिमाग और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता पर असर डाल सकता है। इसलिए गर्मी या ज्यादा पसीना आने की स्थिति में पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहना और गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। डिहाइड्रेशन या हृदय संबंधी लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह लें। किसी गंभीर बीमारी, किडनी या हृदय संबंधी समस्या में अपनी तरफ से पानी या इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बढ़ाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।












