close
LIVE UPDATE

SIM Card Rules: एक नाम पर कितने SIM रख सकते हैं? 9 से ज्यादा SIM होने पर क्या होगा, जानें नया नियम

SIM Card Rules 2026: अगर आपके नाम पर कई मोबाइल नंबर चल रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब आप मनमाने सिम नहीं खरीद सकेंगे। दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा और उससे ज्यादा कनेक्शन रखने वालों की पहचान को लेकर टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों पर जारी SIM कार्ड और उनके जरिए होने वाली साइबर ठगी पर रोक लगाना है।

DoT के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य क्षेत्रों में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रखे जा सकते हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर, असम और कुछ नॉर्थ-ईस्ट सेवा क्षेत्रों में यह सीमा 6 कनेक्शन है। DoT पहले से ही टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग की पहचान के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करता है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

9 SIM के बाद नया कनेक्शन मिलेगा या नहीं?

अगर किसी व्यक्ति के नाम पर सामान्य क्षेत्र में पहले से 9 मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं, तो उसके नाम पर अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं किया जाना चाहिए। टेलीकॉम कंपनियां ग्राहक की पहचान और उसके नाम पर मौजूद कनेक्शनों की जानकारी की जांच कर तय सीमा का पालन करेंगी।DoT के टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल पर भी “Know Mobile Connections in Your Name” सुविधा उपलब्ध है, जिसके जरिए नागरिक अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देख सकते हैं।

10वां SIM कार्ड लेने पर क्या होगा?

यदि किसी व्यक्ति के नाम पर तय सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन पाए जाते हैं, तो अतिरिक्त कनेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। DoT का Digital Intelligence Platform ऐसे मोबाइल कनेक्शनों की पहचान और संबंधित हितधारकों के साथ जानकारी साझा करने में इस्तेमाल होता है।DoT के अनुसार DIP पर डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि संबंधित संस्थाएं आगे जरूरी कार्रवाई कर सकें।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

24 अगस्त से लागू होंगे जरूरी तकनीकी उपाय

आपके दिए विवरण के अनुसार, DoT ने 17 अगस्त 2026 को टेलीकॉम कंपनियों को इस व्यवस्था से जुड़े निर्देश जारी किए हैं। 24 अगस्त 2026 से कंपनियों को ऐसे ग्राहकों की पहचान के लिए जरूरी तकनीकी और संगठनात्मक उपाय करने होंगे, जो निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन लेना चाहते हैं।वहीं, उपलब्ध आधिकारिक DoT सामग्री यह स्पष्ट करती है कि DIP का इस्तेमाल टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग और संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए किया जा रहा है।

30 नवंबर तक रियल टाइम सिस्टम का लक्ष्य

इस व्यवस्था को आगे चलकर रियल टाइम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आपके दिए सर्कुलर के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक सिस्टम को रियल टाइम प्रक्रिया के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया है।इसका उद्देश्य यह है कि नया SIM जारी करने से पहले ही यह पता लगाया जा सके कि संबंधित व्यक्ति के नाम पर पहले से कितने मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सरकार क्यों कर रही है SIM की संख्या सीमित?

फर्जी SIM कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध, बैंकिंग फ्रॉड और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है। DoT पहले से ही ASTR और DIP जैसे सिस्टम का इस्तेमाल संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए कर रहा है। DoT की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार ASTR ऐसे मोबाइल कनेक्शनों की पहचान करने में मदद करता है, जो फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए हों या किसी व्यक्ति के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हों।सरकार का प्रयास है कि संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान जल्दी हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें बंद किया जा सके। DoT के मुताबिक, DIP का इस्तेमाल टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए किया जाता है।

अपने नाम पर कितने SIM हैं, ऐसे करें चेक

अगर आपको शक है कि आपके नाम पर आपकी जानकारी के बिना कोई SIM कार्ड जारी हुआ है, तो DoT की TAFCOP/Know Mobile Connections in Your Name सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। DoT के आधिकारिक पोर्टल पर यह सुविधा नागरिकों को अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी जांचने के लिए उपलब्ध है।नोट: SIM की संख्या और कार्रवाई से जुड़े नियम सेवा क्षेत्र और लागू DoT निर्देशों के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी अतिरिक्त SIM को बंद कराने या अपने नाम से हटाने से पहले आधिकारिक DoT/TAFCOP जानकारी जरूर जांचें।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *